बसंत पर यहां मां सरस्वती की नहीं बल्कि महाकाली की होती है पूजा, वजह जानकार रह जाएंगे दंग

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/01/23 02:34

समूचे भारत में बसंत पंचमी को मां शारदे यानी देवी सरस्वती और भगवान कामदेव की पूजा होती है। लेकिन हमारे ही देश में एक जगह ऐसी भी है जहां बसंत पंचमी पर ज्ञान की देवी सरस्वती या उमंग के देवता कामदेव की नहीं बल्कि पापियों का विनाश करने वाली देवी महाकाली की पूजा होती है। यह जगह शक्तिपीठ के नाम से बिहार के बांका जिले के बाराहाट में स्थित है। गावं में माता काली का एक मंदिर भी है, जहां लोग बड़े ही श्रद्धा के साथ उनकी पूजा अर्चना करते है। 

बसंत पंचमी के दिन भव्य भंडारे का होता है आयोजन 

इस मंदिर में बसंत पंचमी के दिन गजब की रौनक देखने को मिलती है। लोग दूर दूर से आज के दिन माता काली के दर्शन के लिए आते हैं। उनका कहना है कि बसंत को नई शुरुआत का प्रतिक माना गया है लेकिन नई शुरआत तभी हो सकती है जब हम अपने मन की सभी बुरी इक्षाओं, आकांक्षाओं और क्रोध का त्याग कर दे। माता काली हर बुराई को ख़त्म कर देती है। 
बसंत पंचमी के दिन यहां भंडारे का आयोजन किया जाता है इस भंडारे को वार्षिक भंडारा भी कहा जाता है। 

पूजा के पीछे यह है लोगों की मान्यता 

यहां के निवासियों की मान्यता है कि इस गांव को माता काली से आशीर्वाद प्राप्त है। यहां आने वाले हर श्रद्धालु पर माता अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखती है और उसे हर मुसीबत और बुरे संकट से बचाती है।

कहा जाता है कि पौराणिक काल में इस गांव में बहुत ही भारी अकाल पड़ा था। लोग अन्न के एक एक दाने के लिए तरस रहे थे। हालात इतने बुरे थे कि लोगों ने गांव से पलायन करना शुरू कर दिया। इसी दौरान किसी ग्रामीण ने माता काली की पूजा अर्चना की थी। 

जिससे प्रसन्न होकर मां काली खुद चलकर गांव में आई। माता ने लोगों को सभी दुखों और पीड़ाओं से मुक्त कर दिया। भंडारे का आयोजन उसी घटना के याद में किया जाता है।

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