गोरखपुर में अब तक 60 बच्चों की मौत, विपक्ष ने CM योगी से मांगा इस्तीफा

Published Date 2017/08/12 07:02,Updated 2017/08/13 04:14, Written by- FirstIndia Correspondent
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उत्तर प्रदेश | गोरखपुर जिले के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में कथित तौर पर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाने के चलते अब तक करीब 60 बच्चों की मौत हो जाने की खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहनगर में हुए इस हादसे के बाद इलाके में काहराम मच गया है। इस घटना ने सरकार और प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर आजादी के 70 साल बाद भी इस देश में बच्चों की जान इतनी सस्ती है? इस शर्मनाक हादसे के बाद सत्ता पक्ष अपना तर्क रख रही है तो विपक्ष बयानबाजी से अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने में जुट गई है|

मीडिया को इसकी जानकारी देते हुए राज्य के स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री टंडन ने कहा कि हमने काम में लापरवाही के चलते कॉलेज के प्रिंसिपल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। वहीं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा है कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण नहीं हुई है। दूसरी तरफ पीएओ ने ट्वीट करते हुए जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री कार्यालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है साथ ही राज्य और केंद्र के जिम्मेदार अधिकारियों से लगातार संपंर्क में है।

बताया जा रहा है कि 69 लाख रुपए का भुगतान नहीं करने पर ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म ने ऑक्सीजन की सप्लाई ठप कर दी थी, जिसके बाद इंफलाईटिस बुखार से पीड़ित 30 बच्चों की मौत हो गई। इंसेफलाइटिस के मरीजों के लिए बने सौ बेड के आईसीयू सहित दूसरे आईसीयू व वार्डों में देर रात से रुक-रुककर ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने से 30 मासूमों व अन्य मरीजों ने दम तोड़ दिया। यह सिलसिला रात 11.30 बजे से शुरू हुआ व सुबह नौ बजे तक जारी रहा।


अब सरकार के सामने ये बड़े सवाल:
दो दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज का दौरा किया था| इस दौरे के दौरान क्या सीएम योगी ये भी नहीं जान पाए कि किसी भी अस्पताल के लिए जरूरी ऑक्सीजन की सप्लाई में बाधा होने वाली है?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के दौरान क्या अस्पताल प्रशासन ने सीएम को ऑक्सीजन के पैसे के बकाए के बारे में सूचना नहीं दी| अगर नहीं दी तो इस प्रशासनिक भूल के लिए हम बच्चों की जान गंवा देंगे?

मीडिया रिपोर्ट्स से पता चल रहा है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी ने स्थानीय डीएम को सूचित किया था कि बकाया भुगतान नहीं हुआ तो वे कड़ा कदम उठाएंगे| इसके बाद भी डीएम ने इसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया?

क्या ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के लिए 63 लाख रुपए इतनी बड़ी रकम थी कि वह सप्लाई बंद करने जैसा फैसला ले लिया?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑक्सीजन सप्लाई में पांच दिनों से दिक्कतें आ रहीं थीं| अगर ये भी छोड़ दें तो 30 बच्चों की मौत 36 घंटों के दौरान हुई| अस्पताल में दो-तीन बच्चों की मौत के बाद भी अगर प्रशासन ने ऑक्सीजन की व्यवस्था करने में देरी की तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए?

क्या सरकारी मशीनरी के पास इतने भी इंतजाम नहीं थे कि वह दो-तीन घंटे के भीतर ऑक्सीजन की सप्लाई बहाल कर सके?

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