प्रशासन बेखबर, सड़कों पर आवारा जानवरों का राज

Published Date 2018/06/07 03:52, Written by- FirstIndia Correspondent

टोंक। टोंक की सड़कों पर पिछले कुछ महीनों से आवारा जानवरों का राज नजर आ रहा है। जहां भी सडक पर नजर डालो तो यही लगता है कि यह सड़कें इन जानवरों के बैठने के लिये ही बनी है। छावनी सर्किल से लेकर घण्टाघर तक शाम होते-होते सैंकडों की संख्या मे जानवर बैठे एवं घुमते दिखाई देते है। वहीं  दिनभर सडकों इनके बैठने के कारण आये दिन हादसे हो रहे है, लेकिन नगर परिषद अधिकारी इस बारे मे कुछ बोलने से बचते नजर आते है। 

क्या है पूरा मामला

सडक पर बैठी इन गायों को देखकर आपको यह सोचना पडेगा की इतनी मात्रा में यह गायें आखिर क्या कर रही है और कहां से आयी है। दरअसल यह गायें इन दिनो अक्सर सडक दुर्घटनाओ का कारण बन रही है। वही सडक पर इनसे आवागमन मे भी काफी परेशानी टोंक की जनता को उठानी पड़ रही है। टोंक की जनता के लिये यह नजारा हर दिन का है और सुबह से लेकर शाम तक टोंक की सड़कों पर इन्ही गायों का राज नजर आता है।  नगर परिषद कर्मियों और अधिकारियों को यह दिखाई नही देते है, जबकि घण्टाघर से लेकर छावनी तक अधिकारियों की गाड़ियां भी दौड़ती रहती हैं।

वैसे तो सालभर टोंक की जनता को आवारा जानवरों की समस्या से रूबरू होना पडता है, जबकि इससे नगर परिषद को कोई सरोकार नजर नही आता।  नगर परिषद के पास इन आवारा गायों को पकड़कर रखने के लिये कांजी हाउस की व्यवस्था है और नगर परिषद के अधिकारी शायद इसलिये कैमरे के सामने आने से बचने हुये नजर आते है।  शहर में घुमने वाले आवारा पशुओं की संख्या ही लगभग ढाई तीन हजार के करीब है। जिसमें से अधिकतर पशु सवाई माधोपुर चौराहा, बंमोर रोड व हाईवे पर मिलते हैं।  इन जगहों पर आये दिन इन आवारा पशुओं के कारण ही अधिकतर दुर्घटना होती है।  दान करने वाले लोगों के द्वारा मुख्य सडक के बीच में ही पशुओं को चारा डालने से भी यह समस्या और अधिक बढ जाती है।

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