उल्लेखनीय है कि साल 2008 में तलवार दंपति के आवास के भीतर आरुषि मृत पाई गई थी। उसका गला रेत दिया गया था। शुरू में शक की सुई 45 साल के हेमराज की तरफ गई, लेकिन बाद में घर की छत से पुलिस ने उसका शव भी बरामद किया। इस हत्याकांड की त्रुटिपूर्ण छानबीन के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को आलोचना का सामना करना पड़ा था। बाद में राज्य सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

पेशे से डॉक्टर दंपती पर अपनी इकलौती संतान आरुषि (14 साल) के साथ अपने घरेलू नौकर हेमराज (45 साल) की हत्या करने और सबूत मिटाने के आरोप लगे। ये हत्याकाण्ड उस समय हुआ जब आरुषि के माता-पिता दोनों ही फ्लैट में मौजूद थे। इस मामले में विशेष अदालत ने मई 2008 में हुए दोहरे हत्याकांड में तलवार दंपति को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। तलवार दंपति अभी गाजियाबाद की डासना जेल में बंद है। 29 अगस्त 2016 को उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद नुपुर कुछ दिनों के लिए पैरोल पर रिहा की गई थी।

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आरूषि—हेमराज हत्याकांड : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वीकार की तलवार दंपत्ति की याचिका, जांच में कमियां बताकर किया बरी

Published Date 2017/10/12 03:13,Updated 2017/10/12 03:27, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। साल 2008 में हुए नोएडा के बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आज फैसला सुना दिया है। न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र की खंडपीठ इस केस में आरोपी दंपत्ति डॉ. राजेश तलवार और नुपुर तलवार को जांच में कमियां बताते हुए बरी कर दिया है। इस मामले में आरोपी दंपती डॉ. राजेश तलवार और नूपुर तलवार ने सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद की ओर से उम्रकैद की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी।

इस दोहरे हत्याकांड में आरोपी दंपती डा. राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद की ओर से दी गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील दाखिल की है। तब दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। गौरतलब है ​कि गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने 2013 में डॉ. राजेश और नुपूर तलवार को अपनी बेटी आरूषि और घरेलू सहायक हेमराज की हत्या का दोषी करार दिया था। सीबीआई अदालत के इसी फैसले के खिलाफ तलवार दंपति ने उच्च न्यायालय में अपील की थी।

उल्लेखनीय है कि साल 2008 में तलवार दंपति के आवास के भीतर आरुषि मृत पाई गई थी। उसका गला रेत दिया गया था। शुरू में शक की सुई 45 साल के हेमराज की तरफ गई, लेकिन बाद में घर की छत से पुलिस ने उसका शव भी बरामद किया। इस हत्याकांड की त्रुटिपूर्ण छानबीन के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को आलोचना का सामना करना पड़ा था। बाद में राज्य सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

पेशे से डॉक्टर दंपती पर अपनी इकलौती संतान आरुषि (14 साल) के साथ अपने घरेलू नौकर हेमराज (45 साल) की हत्या करने और सबूत मिटाने के आरोप लगे। ये हत्याकाण्ड उस समय हुआ जब आरुषि के माता-पिता दोनों ही फ्लैट में मौजूद थे। इस मामले में विशेष अदालत ने मई 2008 में हुए दोहरे हत्याकांड में तलवार दंपति को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। तलवार दंपति अभी गाजियाबाद की डासना जेल में बंद है। 29 अगस्त 2016 को उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद नुपुर कुछ दिनों के लिए पैरोल पर रिहा की गई थी।

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