ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित मुकेश शास्त्री के अनुसार गणेश चतुर्थी पर पूजा का शुभ मुहूर्त

Published Date 2017/08/24 01:24,Updated 2017/08/24 02:13, Written by- Pandit Mukesh Shastri

श्रीगणेश चतुर्थी विघ्नराज, मंगल कारक, प्रथम पूज्य, एकदंत भगवान गणपति के जन्म का उत्सव पर्व है। हर व्यक्ति का अपने जीवन में यही सपना है की रिद्धि सिद्धि, शुभ-लाभ उसे निरंतर प्राप्त होता रहे, जिसके लिए वह इतना अथक परिश्रम करता है| ऎसे में गणपति हमें प्रेरित करते हैं और हमारा मार्गदर्शन करते हैं| गणेश पुराण के अनुसार गणपति अपनी छोटी-सी उम्र में ही समस्त देव-गणों के अधिपति इसी कारण बन गए क्योंकि वे किसी भी कार्य को बल से करने की अपेक्षा बुद्धि से करते हैं। बुद्धि के त्वरित व उचित उपयोग के कारण ही उन्होंने पिता महादेव से वरदान लेकर सभी देवताओं से पहले पूजा का अधिकार प्राप्त किया|

भगवान श्रीगणेश की आराधना श्रद्धानिष्ठ होकर करने से गणपति की कृपा से देवता व पित्र प्रसन्न होते हैं। शिव-शक्ति के पुत्र, रिद्धि-सिद्धि के पति, शुभ-लाभ एवं सदा सुख शांति देने वाली माता संतोषी के पिता श्रीगणेश की कृपा से ही मनुष्य को संसार में संपदा प्राप्त होती है।

व्यापारी को व्यापार लाभ के लिए, कर्मचारी को पदोन्नति के लिए, गृहस्थी को घर में सुख, शांति के लिए भगवान श्रीगणेश की ही आराधना चाहिए। श्रीगणेश के आचार-विचार, व्यवहार, स्वभाव आदि सभी में जनहित व लाइफ मैनेजमेंट की बातें हैं इसलिए इन्हें लाइफ मैनेजमेंट गुरु भी कहा जाता है।

इस बार श्री गणेश चतुर्थी आज 25 अगस्त शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। यह त्योहार इस बार ‘महाचतुर्थी’ के संयोग में मनेगा। गणेश चतुर्थी पर हस्त नक्षत्र और माता पार्वती के प्रिय वार शुक्रवार के दिन हर तरह से  गणेश आराधना करना सुख-समृद्धिदायक रहेगा। हस्त शुभ फल देने वाला नक्षत्र है। हस्त नक्षत्र के साथ गणेश चतुर्थी आने से भगवान गणपति भक्तों की मनोकामना शीघ्र पूर्ण करेंगे तथा धनलाभ के शुभ अवसरों का निर्माण होगा। गणेश चतुर्थी को शुक्रवार होने से लक्ष्मी कारक योग बनता है। यह कारोबार, नौकरी, अध्ययन सहित सभी क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए शुभ सौगात लेकर आता है।

हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य मुहूर्त देखकर किए जाने का विधान है। धर्म ग्रंथों के अनुसार शुभ मुहूर्त देखकर किए गए कार्य शुभ व सफल होते हैं।

गणेश पूजन के लिए शास्त्रों में मध्यान्ह काल श्रेष्ठ माना गया है| गणेश जी की पूजा का श्रेष्ठ समय - मध्यान्ह काल दोपहर 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर 1 बजकर 45 मिनट तक रहेगा| 

चौघड़िया के अनुसार गणेश पूजन का समय -
प्रातः 6:07  से 10:53  मिनट तक चर ,लाभ और अमृत का चौघड़िया रहेगा| दोपहर 12:29  से  दोपहर 02:05 मिनट तक शुभ का चौघड़िया रहेगा| सायं 5:16 से सायं 06.51 मिनट तक-चर का चौघड़िया रहेगा जिसमे भगवान गणेश जी का पूजन किया है।

गणेश पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त मध्यान्ह काल मे अभिजीत मुहूर्त और वृश्चिक लग्न में माना गया है जो इस बार दिनांक 25 अगस्त शुक्रवार को दोपहर  12 बजकर 4 मिनट से दोपहर 1 बजकर 45 मिनट तक वृश्चिक लग्न मे श्री गणेश जी का पूजन  सबसे शुभ रहेगा। इन लग्नों में किया गया कोई भी शुभ कार्य स्थाई होता है।इस दौरान भगवान का विधि-विधान से पूजन करें। गणपति की कृपा से दुखों व तकलीफों का निवारण होगा। आप इस का ध्यान रखे और लाभ उठाये।
 

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