जनआक्रोश रैली की सफलता से फिर बढ़ा अशोक गहलोत का कद

Dinesh Kumar Dangi Published Date 2018/04/30 07:25

जयपुर। सियासत के 'जादूगर' कहे जाने वाले राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के 'चाणक्य' यानि संगठन महामंत्री के रोल को बखूबी निभाने लग गए हैं। गहलोत जनआक्रोश रैली के पहले टास्क में एक बार फिर खरे साबित हुए हैं। रैली में भीड़ जुटाने, अनुशासन बनाने, राहुल का भाषण और कार्यकर्ताओं में जोश भरने जैसी तमाम जिम्मेदारी गहलोत के पास थी गहलोत ने अनुभव और अपनी सूझबूझ से एक बार फिर हर चुनौती और रणनीति को बखूबी अंजाम दिया।

राहुल गांधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस की दिल्ली में पहली पब्लिक सभा, इसकी जिम्मेदारी दी गई पार्टी की नंबर दो पोस्ट संभाल रहे संगठन महामंत्री और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को। गहलोत ने अभी कुछ दिनों पहले ही दिल्ली में यह पद संभाला था, लेकिन उसके बावजूद गहलोत ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए रैली को कामयाब बनाने के लिए दिन रात एक कर दिए।

बताया जा रहा है कि रैली का आईडिया भी गहलोत का था। लिहाजा, इसके लिए करीब 20 दिन तक गहलोत ने दिल्ली में डेरा डाले रखा और भीषण गर्मी-शादियों के बीच भीड़ दिल्ली लाने के लिए दिन—रात एक कर दिए। यहां तक कि उससे एक रात पहले राहुल गांधी के भाषण को तैयार करने में भी रोल निभाया। ठीक वैसे ही जब एक जमाने पर इसी पोस्ट पर रहे जनार्दन दि्वेदी सोनिया गांधी का भाषण लिखते थे। गहलोत ने अपने भाषण के दौरान जो बातें कहीं, उसे बाद में राहुल ने भी अपने संबोधन में दोहराया।

गहलोत ने भीषण गर्मी के मद्देनजर लोगों की परेशानियों को देखते हुए समय का विशेष ध्यान रखते हुए समय का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए थे। यह उस वक्त सही साबित हुआ, जब राहुल गांधी तय वक्त करीब साढ़े 11 बजे राहुल मंच पर आ गए। राहुल गांधी के अलावा अन्य नेताओं के बोलने की कम लिस्ट बनाई और उनके भाषण के लिए भी तीन से पांच मिनट का समय निर्धारित कर दिया था।

वहीं गर्मी को देखते हुए गहलोत ने कूलर और ठंडी नमकीन की छाछ का भी इंतजामात करने की सलाह दी। वहीं गहलोत मंच पर खूब एक्टिव रहे। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अहमद पटेल औऱ मनमोहन सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं को गहलोत ने रिसीव किया। मंच पर ऐसा कोई नेता नहीं था, जो गहलोत को इस कामयाब रैली के आयोजन की बधाइयां नहीं दे रहा था। कार्यकर्ताओं को यह राज भी बता दिया कि आखिर रैली का नाम जनआक्रोश क्यों रखा।

गहलोत का जादू राहुल और रैली में पूरी तरह से चल गया। हर कोई राहुल के शानदार भाषण की तारीफ करते हुए इसके पीछे किसका हाथ था, इसको लेकर चर्चा में जुट गया। वहीं कांग्रेस पार्टी और कार्यकर्ताओं में रैली के जरिये जोश भरने की गहलोत अपनी मैसेज की सियासत में भी कामयाब हो गए।

साफ है रैली में जुटी लाखों की भीड़ और उसकी कामयाबी से गहलोत की बल्ले—बल्ले हुई है। आलाकमान के समक्ष उनका कद भी बढ़ गया है। ऐसे में तय है कि गहलोत आने वाले दिनों में कांग्रेस की मजबूती के लिए और एक्सपेरिमेंट् करते रहेंगे। संघटन कार्यकर्ता के तौर पर मिले अनुभवों से वो अब पूरी तरह से पार्टी को सक्रिय करने में जुट गए हैं।

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