गुजरात चुनाव : सत्ता विरोधी लहर बनने से रोकने के लिए भाजपा अपनाएगी ये पैंतरा!

FirstIndia Correspondent Published Date 2017/11/11 03:45

अहमदाबाद। गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर एक ओर जहां दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस ने चुनावी समर में अपनी-अपनी ताल ठोक रखी है। इसी के चलते सत्ता पर अपना कब्जा बनाए रखने और एंटी इनकंबेंसी यानि सत्ता विरोधी लहर बनने से रोकने के लिए भाजपा ने नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत दो बार से ज्यादा विधायक रह चुके नेताओं को चुनावी टिकट नहीं दिया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, गुजरात चुनाव में भाजपा अपनी रणनीति के तहत दो बार से ज्यादा बार विधायक बनने वाले नेताओं का इस बार चुनाव में टिकट नही देगी। हालांकि यह भी बताया जा रहा है कि इस फॉर्मूले में उन युवा नेताओं को छूट दी जा सकती है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में अपनी लोकप्रियता बरकरार रखी हुई है।

गौरतलब है कि भाजपा ने इससे पूर्व दिल्ली में हुए निकाय चुनाव में भी इसी तरह का फॉर्मूला काम में लिया था, जिसमें लगातार तीन बार चुनाव जीतने वाले पार्षदों के बजाय नए उम्मीदवारों को तरजीह दी गई थी। पार्टी के इस फॉर्मूला के सार्थक नतीजे भी सामने आए थे और पार्टी ने एमसीडी के तीनों जोन में बड़ी सफलता हासिल की थी।

पार्टी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले इस फॉर्मूले में खास बात ये है कि इस फॉर्मूला से लोगों की अपने विधायक के प्रति अगर कोई नाराजगी है तो नया उम्मीदवार खड़ा कर लोगों की नाराजगी को दूर किया जा सकता है। ऐसे में लोगों को नए उम्मीदवार के रूप में पार्टी के प्रत्याशी को वोट देने का विकल्प मिल जाता है, जिससे पार्टी के लिए जीत की राह आसान हो जाती है।

दरअसल, राज्य में कई जगहों पर सत्ताधारी दल भाजपा के खिलाफ भी माहौल है, जिसे भुनाने के लिए कांग्रेस भरसक प्रयास कर रही है। हाल ही में सोशल मीडिया पर 'विकास पागल हो गया' और 'विकास गांडो थयो छे' का काफी जोर रहा था, जिसे भी कांग्रेस जमकर भुनाते हुए लोगों का समर्थन हासिल करने के प्रयासों में जुटी है। वहीं पाटीदारों में बीजेपी का विरोध मुखर हुए हैं और पाटीदार इलाकों में भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए 'धारा 144' लगाई गई है।

ऐसे में सत्ताधारी पार्टी के विधायकों के प्रति भी लोगों की नाराजगी मानी जा रही है, जिसे देखते हुए भाजपा कोई भी मौका हाथ से न जाने देते हुए अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। ऐसे में पार्टी ने लोगों की नाराजगी दूर करने के इरादे से ऐसे विधायकों के टिकट काटने का फैसला किया है, जो दो बार से ज्यादा विधायक रहे चुके हैं। उनकी जगह पर अब नए उम्मीदवारों को तरजीह दी जा सकती है, जो पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

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