केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, बताया- रोहिंग्‍या देश के लिए खतरा

Published Date 2017/09/18 06:07,Updated 2017/09/18 06:35, Written by- FirstIndia Correspondent

केंद्र सरकार ने रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को भारत में संवैधानिक अधिकारी देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने 16 पन्नों का जवाब दाखिल किया। अपने जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि रोहिंग्या शरणार्थियों को देश में नागरिक की सुविधा देना गैर-कानूनी है। केंद्र का कहना है कि रोहिंग्या मुसलमान आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं। ऐसे में देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनका भारत में रहना सही नहीं है।

इसके साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा कि कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए। वहीं हाल ही में रोहिंग्या मुसलमानों का पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी ने खुलकर समर्थन किया था और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि रोहिंग्या मुसलमान इंसान हैं न की आतंकवादी और सरकार को इनकी मदद करनी चाहिए। वहीं भारत सरकार द्वारा देश से रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने की कोशिशों की संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख जैद राद अल हुसैन ने कड़े शब्दों में निंदा की थी।

गौरतलब है कि बीते अगस्त महीने से हिंसा के कारण म्यांमार से बड़ी तादाद में रोहिंग्या मुसलमानों का पलायन जारी है। म्यांमार में 25 अगस्त को भड़की हिंसा के दो हफ्तों के भीतर 400 लोगों के मारे जाने की खबर थी। म्यांमार में करीब 11 लाख रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं। रोहिंग्या मुसलमान खुद को अरब और फारसी व्यापारियों का वंशज मानते हैं।

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