सेंट्रल जेल में अव्यवस्थाओं पर आदेशों की पालना नहीं होने से कोर्ट ने जताई नाराजगी

Published Date 2018/05/16 06:51, Written by- FirstIndia Correspondent

जयपुर। सेंट्रल जेल में अव्यवस्थाओं से जुड़े मामले पर आज हाईकोर्ट में जस्टिस मोहम्मद रफीक की खण्डपीठ में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आज मामले में अदालती आदेशों की पालना नहीं होने पर बेहद नाराजगी जाहिर की। हाईकोर्ट ने मामले में यह साफ कर दिया कि यदि 28 मई तक एनओवी (नॉन ऑफिशियल विजिटर्स) की नियुक्ति नहीं की गई, तो एसीएस होम हाईकोर्ट में पेश हो। साथ ही अदालती आदेशों की पालना नहीं करनें पर हाईकोर्ट मामले में अवमानना की कार्रवाई अमल में लाएगा।

दरअसल, मामले में आज से आठ वर्ष पहले जेलों में अव्यवस्थाओं के मामले में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया गया था। मामले में हाईकोर्ट ने समय—समय पर करीब 45 बिन्दुओं पर दिशा निर्देश दिए। इसमें रोटी मेकर लगाने, जेल में मोबाइल की धरपकड़, कैदियों के लिए शौचालय निर्माण, जैमर लगाने जैसे निर्देश शामिल हैं।

वहीं मामले में आठ माह पहले हाईकोर्ट ने एनओवी की नियुक्ति के आदेश दिए थे, लेकिन अदालती आदेशों की पालना नहीं हुई। इस पर इस बार हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह साफ कर दिया है कि यदि 28 मई तक अदालती आदेश की पालना नहीं हुई तो हाईकोर्ट अवमानना की कार्रवाई अमल में लाएगा।

हाईकोर्ट में आज बीईएलए की ओर से हाईकोर्ट में यह प्रपोजल पेश किया गया कि जयपुर सेंट्रल जेल में लगे हुए जैमर्स को जोधपुर, बीकानेर व भरतपुर स्थित जेलों में टेस्टिंग के लिए लगाया जाए। साथ ही आज हाईकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा पेश की गई 45 बिन्दुओं की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट संतुष्ट नजर नहीं आया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को साफ तौर पर यह निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई की तारीख पर क्रमवार 45 बिन्दुओं के संबंध में रिपोर्ट पेश करें। अन्यथा हाईकोर्ट अवमानना की कार्रवाई अमल में लाएगा।

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