आप जानते है क्या अंतर है परमाणु बम और हाइड्रोजन बम में, कौनसा है ज्यादा खतरनाक!!

Published Date 2017/09/23 05:06,Updated 2017/09/23 05:24, Written by- FirstIndia Correspondent

दुनिया के दो शक्तिशाली देशों उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच इन दिनों परमाणु परीक्षणों के लेकर जबरदस्त जंग छिड़ी हुई है| एक तरफ उत्तर कोरिया अपने परीक्षणों को रोकने के लिए तैयार नहीं, तो दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों का शिकंजा कसने के साथ ही उसे गंभीर नतीजे भुगतने की चेतावनी भी दे रहा है| इसी बीच, उत्तर कोरिया ने यह भी कह दिया है कि वह प्रशांत क्षेत्र में हाइड्रोजन बम का भी इस्तेमाल कर सकता है|

इन सब के बीच में सवाल ये उठता है कि परमाणु हथियारों में प्रमुख रूप से दो तरह के हथियार शामिल हैं पहला एटम बम और दूसरे जो ज्यादा शक्तिशाली हैं यानी हाइड्रोजन बम, लेकिन इन दोनों में से सबसे ज्यादा शक्तिशाली और खतरनाक कौनसा हथियार है|

परमाणु बम:
दूसरे विश्वयुद्ध के आखिरी दिनों में अमेरिका ने दो बार परमाणु बमों का जापान पर इस्तेमाल किया हालांकि इन बमों का कई सौ बार पहले परीक्षण किया जा चुका है| परमाणु बम नाभिकीय विखंडन पर आधारित होते हैं| इसमें हथियार में लगे संवर्धित यूरेनियम या प्लूटोनियम परमाणु के टूटने से भारी मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है| इस बम का सबसे पहला विस्फोट अमेरिका के न्यू मेक्सिको राज्य के रेगिस्तान में परीक्षण के दौरान 16 जुलाई 1945 में हुआ था|

माना जाता है कि एक गुप्त परियोजना के तहत इसे विकसित किया गया था क्योंकि तब यह माना जा रहा था कि नाजी जर्मनी भी इसे विकसित कर रहा है| 6 अगस्त को अमेरिका ने दक्षिणी जापान के हिरोशिमा शहर पर पहली बार परमाणु बम गिराया| अनुमान है कि इसमें करीब 140,000 लोग मारे गये| तीन दिन बाद दूसरे बम ने नागासाकी को तबाह कर दिया जिसमें करीब 74000 लोग मारे गये| इसके बाद जापान ने समर्पण कर दिया और दूसरा विश्व युद्ध खत्म हो गया| सोवियत यूनियन दूसरा देश था जिसने परमाणु बम का परीक्षण किया| यह साल 1949 था. इसके बाद ब्रिटेन तीसरा परमाणु ताकत वाला देश बना और उसने 1952 में ये परीक्षण किये|

हाइड्रोजन बम:
परमाणु बमों से कई गुना ज्यादा ताकतवर हैं हाइड्रोजन या थर्मोन्यूक्लयर बम| यह हाइड्रोजन आइसोटोप्स के आपस में मिलने के सिद्धांत पर काम करते हैं| इसमें दो परमाणु नाभिकों के मिलने से भारी मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है और सूर्य की असीमित ऊर्जा का स्रोत भी उसके गर्भ में होने वाली यही प्रक्रिया है| अभी तक किसी भी युद्ध में हाइड्रोजन का इस्तेमाल नहीं हुआ है| दुनिया के परमाणु हथियारों के जखीरे में बहुत सारे हाइड्रोजन बम भी शामिल हैं| इस बम में एक दो चरणों की प्रक्रिया होती है जिसमें परमाणु विस्फोट भारी मात्रा में ऊष्मा पैदा करता है और फिर इसके नतीजे में नाभिकों का आपस में जुड़ना शुरू होता है जिसमें और ज्यादा बड़ा धमाका होता है|

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