अब विधानसभा चुनाव पर डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की नजरें!

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/05/24 08:23

जयपुर। बीजेपी में शामिल होने और राज्यसभा पहुंचने के बाद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को लेकर यहीं अटकलें हैं कि वे दिल्ली की राजनीति करेंगे, लेकिन वे दिल्ली की सियासत के साथ—साथ राजस्थान की राजनीति में भी सक्रिय रहना चाहते हैं। मीणा के राजनीति के केन्द्र में रहने की उनकी कोशिश भी बरकरार है। साथ ही राजस्थान की राजनीति में भी दबदबा कायम रखेंगे।

लिहाजा, इसी साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनावों के समर में फिर उतर सकते हैं। उनके सिपहसलार डॉक्टर साहेब के लिये सीट तलाशने में जुट गये हैं। एसटी और ओपन दोनों सीटों पर उनकी नजरें है। यह अलग बात है कि मोदी सरकार के भावी मंत्रीपरिषद फेरबदल और विस्तार में उनका नम्बर लग सकता है।
देश की सर्वोच्च पंचायत संसद के ऊपरी सदन में पहुंचने के बाद भी डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को दिल्ली कम ही रास आ रहा है। पूर्वी राजस्थान में उनकी सक्रियता पहले के मुकाबले बढ़ गई है। खांटी मीणा बेल्ट पर उन्होंने फोकस कर रखा है। इच्छा जगी हुई है फिर विधानसभा चुनावों के समर में उतरने की। राज्यसभा सांसद रहते हुए किरोड़ी अगले विधानसभा चुनावों में चुनाव लड़ सकते हैं।

करीब एक दर्जन सीटों पर उनकी नजरें गड़ी है। यहां उनके सिपहसलार और रणनीतिकार जातीय गणित को आंक रहे हैं। डॉक्टर साहेब और उनकी पत्नी गोलमा देवी के लिये सीटें तलाशी जा रही है। भाई जगमोहन मीणा को लोकसभा चुनाव लड़ाने की रणनीति पर विचार चल रहा है। भतीजा राजेन्द्र मीणा भी चुनाव लड़ने की इच्छा रखता है। हालांकि बीजेपी और किरोड़ी को मिलकर तय करना है कि परिवार में से कौन लड़ेगा चुनाव। फिलहाल चर्चा है डॉ किरोड़ी के विधानसभा चुनाव लड़ने की। 

मीन क्षत्रप के तौर पर चर्चित डॉ. किरोड़ी लाल मीणा अब अपने मूल सियासी दल में लौट चुके हैं। विरोधी कह रहे हैं कि इस कारण उनकी सियासी धार कम होगी। मीणा वोटों का झुकाव कांग्रेस की ओर दिख रहा है। इन तमाम तथ्यों के बीच डॉ किरोड़ी लाल मीणा के सामने चुनौती है, खुद का अस्तित्व बचाने की। साथ ही उन मीना नेताओं को धूल चटाने की, जिनका उनसे पुराना बैर है। 

चार मीना नेता ऐसे हैं, जिनका उनसे राजनीतिक तौर पर पुराना बैर रहा है। इनमें तीन कांग्रेस में और एक उनकी खुद की पार्टी बीजेपी में है। राजपा को अपने दम पर चार सीटें जीताने की क्षमता रखने वाले डॉ किरोड़ी के लिये विधानसभा चुनावों की राह इतनी आसां नहीं होगी, लेकिन चुनौती स्वीकारना उनके जहन में रहा है।
पूर्वी पट्टी की सियासत में आज भी वे सिरमौर के तौर पर जाने जाते हैं, लेकिन यहीं पीसीसी चीफ सचिन पायलट का प्रभाव क्षेत्र भी है। गुर्जर आबादी बाहुल्य पूर्वी पट्टी ही पायलट को राजस्थान की सियासत में सर्वाधिक पसंद है। किरोड़ी की कर्मभूमि दौसा रही है तो पायलट परिवार की कर्मभूमि भी यहीं है।

किन सीटों पर चल रही है उनकी रिसर्च :
विधानसभा सीट                                 मीणा-मीना वोटों का गणित
राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ (एसटी रिजर्व)          करीब 70 हजार 
लालसोट (एसटी रिजर्व)                        करीब 70 हजार
महुवा                                                करीब 50 हजार
सवाई माधोपुर                                    करीब 50 हजार
टोड़ाभीम (एसटी रिजर्व)                       करीब 70 हजार
दौसा                                                करीब 40 से 45 हजार
सपोटरा (एसटी रिजर्व)                        करीब 80 हजार
बस्सी (एसटी रिजर्व)                          करीब 65 हजार
देवली-उनियारा                                 55 हजार लगभग
जमवारामगढ़ (एसटी रिजर्व)               लगभग 70 हजार

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