फर्स्ट इंडिया ने जाना 'धान' के किसानों का दर्द

Published Date 2018/06/28 01:27,Updated 2018/06/28 01:58, Written by- FirstIndia Correspondent

जैतसर (श्रीगंगानगर)। जैतसर के गांव सरदारगढ़, हिंदों और जीबी क्षेत्र कभी बम्पर धान (चावल) की फसल उत्पादित करने के कारण राईस बेल्ट के नाम से जाने जाते थे। लेकिन अब हालात ऐसे हो चले हैं कि यहां अब इन गांवों में धान की रोपाई महज नाम मात्र की ही रह गई है।

फर्स्ट इंडिया ने इन गांवों का सर्वे किया तो पता चला कि आधे से अधिक किसानों ने धान की बुवाई करना ही छोड़ दिया है। जब हमने कारण जानना चाहा तो किसानों ने सिंचाई के लिए पानी नहीं आना, बारिश का अभी तक न होना और पास से गुजर रही बरसाती घग्घर नदी में अब तक पानी की आवक नहीं होना इसका प्रमुख कारण है। ऐसे में कभी राईस बेल्ट व धान का कटोरा कहलाने वाला क्षेत्र आज धान के उत्पादन में पूर्ण रुप से पिछड़ गया है।

किसानों का कहना है कि धान के लिए हर समय पानी की आवश्यकता होती है। इतना पानी नहीं होने के कारण सैकड़ों किसानों ने इस बार धान की रोपाई ही नहीं की। नलकूप से पानी लगने पर अधिक खर्चा होता है और फसल का मूल्य कम होने के कारण किसानों को काफी हानि उठानी पड़ती है। ऐसे में किसानों ने सरकार से नहरों में फसल पकाव के लिए अतिरिक्त पानी देने की मांग की है।

किसानों ने बताया कि अभी तब बारिश नहीं होने के कारण घग्घर नदी में पानी नहीं पहुंचा है और नदी में पानी आने के बाद ही किसानों को धान रोपाई की आस होती है। ऐसे में नदी में अभी तक पानी नही आने के कारण वह आस अब धूमिल होती जा रही है।

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