अपने तमाम भरोसेमंद नेताओं को गहलोत ने मैदान में काम शुरु करने के निर्देश भी दे दिए हैं। ऐसे में जो विरोधी गुट गहलोत के गुजरात प्रभारी बनाकर भेजने के बाद राजस्थान की सियासत से दूर होने की खुशियां मना रहे थे, उनके अरमान जल्द ही ठंडे होने वाले हैं। हालांकि दिग्गज और राजनीति के चाणक्य यह नेता मीडिया के सामने अपनी इच्छा जाहिर नहीं कर रहे। गहलोत कहते हैं कि आज तक आलाकमान ने जो काम दिया उसे शिद्दत से निभाया है और आगे भी ऐसा ही करेंगे।

गुजरात चुनाव परिणाम से कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी बेहद संतुष्ट नजर आ रहे हैं। यकीनन इसके पीछे गहलोत की कितनी मेहनत है, यह राहुल बखूबी जानते हैं। ऐसे में राहुल को अब साफ पता चल गया है कि जब गहलोत पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के गृहराज्य में पसीना ला सकते हैं तो राजस्थान में तो पार्टी को यकीनन जीत की राह पर ले जा सकते हैं। लिहाजा, अब सभी की निगाहें इस बात पर है कि गहलोत किस रोल में राजस्थान में आते हैं औऱ किस तरह संगठन पर अपनी पकड़ बनाते हैं।

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गहलोत का बढ़ा कद, हाईकमान ने किया राजस्थान के लिए इशारा!

Published Date 2017/12/19 06:36,Updated 2017/12/19 07:09, Written by- Dinesh Kumar Dangi

जयपुर। गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बेहतरीन और उम्दा प्रदर्शन में मुख्य रोल निभाने वाले राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का यकीनन पार्टी और अालाकमान के सामने कद बढ़ा है। गहलोत को जब गुजरात में प्रभारी बनाकर भेजा गया था तो उनके सामने पार्टी के कमजोर संगठन में जान फूंकना और मोदी-शाह के गढ़ में सत्तारुढ़ भाजपा से टक्कर लेना जैसी बड़ी चुनौती थी।लेकिन राजनीति के इस जादूगर ने अपने अनुभव और कौशल से तमाम चुनौतियों का डटकर और बखूबी मुकाबला किया। यहां तक कि हिन्दूत्व की प्रयोगशाला में भाजपा के ध्रुवीकरण की चाल पर पानी फेर दिया।

इसके लिए गहलोत ने राहुल के मंदिर दर्शन करने की योजना बनाते हुए सॉफ्ट हिन्दुत्व का सहारा लिया। जातिगत और सियासी समीकरण की किलेबंदी के लिए हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकुर औऱ जिग्नेश मेवाणी जैसी युवा तिकड़ी को कांग्रेस के साथ लाए। गहलोत ने पिछले छह माह तक लगातार गुजरात में डेरा डाले रखा औऱ यहां तक कि दिवाली जैसे अन्य त्यौहार पर भी घर नहीं आए। वहीं रणनीति में कोई कोर कसर बाकी ना रहे, इसके लिए करीब 200 वफादार पर्यवेक्षकों को हर सीट पर तैनात किया, ताकि पल पल की हर रणनीति का फीडबैक मिल सके।

अब जब गहलोत हर मोर्चे पर कामयाब हुए तो उन्हें बदले में आलाकमान क्या ईनाम देगा। यही चर्चा दिल्ली से जयपुर और हर कांग्रेस नेता की जुबां पर चल रही है। तरह तरह की अटकलें तेजी से शुरु हो गई है। सूत्रों के मुताबिक गहलोत राजस्थान में नए साल में फिर नए रोल में मजबूती से आने वाले हैं। इसके लिए बताया जा रहा है कि हाईकमान ने भी गहलोत को इशारा कर दिया है। मसलन राजस्थान में कैसे भाजपा को हराया जाए, किन मुद्दों पर सरकार को घेरा जाए, जिसके बाद गहलोत और उनकी टीम राजस्थान सरकार के अब तक के कामकाज के दस्तावेज जुटाने में जुट गए हैं।

अपने तमाम भरोसेमंद नेताओं को गहलोत ने मैदान में काम शुरु करने के निर्देश भी दे दिए हैं। ऐसे में जो विरोधी गुट गहलोत के गुजरात प्रभारी बनाकर भेजने के बाद राजस्थान की सियासत से दूर होने की खुशियां मना रहे थे, उनके अरमान जल्द ही ठंडे होने वाले हैं। हालांकि दिग्गज और राजनीति के चाणक्य यह नेता मीडिया के सामने अपनी इच्छा जाहिर नहीं कर रहे। गहलोत कहते हैं कि आज तक आलाकमान ने जो काम दिया उसे शिद्दत से निभाया है और आगे भी ऐसा ही करेंगे।

गुजरात चुनाव परिणाम से कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी बेहद संतुष्ट नजर आ रहे हैं। यकीनन इसके पीछे गहलोत की कितनी मेहनत है, यह राहुल बखूबी जानते हैं। ऐसे में राहुल को अब साफ पता चल गया है कि जब गहलोत पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के गृहराज्य में पसीना ला सकते हैं तो राजस्थान में तो पार्टी को यकीनन जीत की राह पर ले जा सकते हैं। लिहाजा, अब सभी की निगाहें इस बात पर है कि गहलोत किस रोल में राजस्थान में आते हैं औऱ किस तरह संगठन पर अपनी पकड़ बनाते हैं।

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