न्यूनतम वेतन के बराबर मानदेय नहीं दे रही सरकार

Published Date 2018/06/11 08:05,Updated 2018/06/11 09:19, Written by- FirstIndia Correspondent

सराड़ा (उदयपुर)।अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के संस्थापक एवं प्रभारी छोटे लाल बुनकर ने लगाया सरकार पर आरोप।न्यूनतम वेतन के बराबर भी मानदेय नहीं देकर सरकार कर रही कार्मिकों का शोषण। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला कार्मिकों ने भाग लिया।

अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के संस्थापक एवं प्रभारी छोटे लाल बुनकर ने चावण्ड स्थित चामुण्डा माताजी मन्दिर परिसर में संघ के बैनर तले आयोजित एक दिवसीय महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्मिकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि,"पूर्ववर्ती सरकार की महिला हिताधिकारी योजनाओं को रोककर, न्यूनतम वेतन के बराबर भी मानदेय नहीं देकर सरकार आंगनवाड़ी महिलाओं का आर्थिक एवं मानसिक शोषण कर रही है,साथ ही महिलाओं को किये चुनावी वादे को भूलकर अन्याय कर रही है।"

उन्होंने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि, "मुख्यमंत्री द्वारा अंतिम बजट में आंशिक मानदेय बढ़ोतरी कर ली, लेकिन सरकार बनाने से पहले महिला कर्मियों को मानदेय बढ़ोतरी के साथ-साथ एक नियमित कर्मचारी बनाने का सपना दिखाकर जो वादा किया वो झूठा और खोखला साबित हुआ। इन झूठे आश्वासनों से महिलाकर्मी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रही है।"बुनकर ने महिलाकर्मियों से  18 जून से 21 जुलाई तक निरंत अपने क्षेत्र के विधायक, सांसद, मंत्री व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर चुनावी वादा याद दिलाने का आह्वान किया। 

सरकार पर आंगनबाड़ी महिलाकर्मियों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए बुनकर ने कहा कि,"सबसे अधिक परिश्रम के बावजूद आज न्यूनतम वेतन के बराबर भी मानदेय नहीं देकर सरकार द्वारा आर्थिक एवं मानसिक शोषण किया जा रहा है। प्रदेश की महिलाओं ने अपनी मांगों को लेकर सितंबर माह में प्रादेशिक हड़ताल की थी जिसमें अन्य राज्यों के मुकाबले तुलनात्मक मानदेय का समझौता हुआ था, लेकिन सरकार ने आज तक पूरा नहीं किया। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, आंध्र प्रदेश व मध्य प्रदेश में 10000 से अधिक का मानदेय दिया जा रहा है, जबकि राजस्थान में 25 सौ से लेकर 6 हजार तक का मानदेय दिया जा रहा है जो बहुत अल्प है।" 

छोटे लाल बुनकर ने वर्तमान सरकार पर पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं को रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि, "पूर्व सरकार ने आंगनबाड़ी कर्मियों के हित को देखते हुए 100 करोड़ के कल्याण कोष का गठन कर बीमारी पर न्यूनतम 5 हजार से लेकर हार्ट, कैंसर, लीवर सहित अन्य गंभीर बीमारियों पर एक लाख की तत्काल सहायता,आंगनबाड़ी महिला कर्मियों के बच्चों को साढ़े सात सौ से उच्च शिक्षा पर एक लाख तक की छात्रवृत्ति व सेवानिवृत्त कर्मियों को पेंशन योजना से भी जोड़ा। जिसमें मानदेय सेवा पूर्ण करने पर एक हजार की न्यूनतम पेंशन का प्रावधान था। वर्तमान सरकार ने इस महत्वपूर्ण योजना को रोक दिया है। जिन्हें सरकार तुरन्त लागू करें, इसके अलावा कई मांगे और रखी है।" 
 

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