क्या कभी आपने भी सुनी है उर्दू में पढ़े जाने वाली यह रामायण?

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/05 03:18

बीकानेर (संजय पारीक)। रामायण तो आपने कई बार सुनी और पढ़ी होगी, लेकिन जब कोई उर्दू में रामायण वाचन की बात करे तो अपने आप में कुछ अलग ही एहसास देती है। जी हां, बीकानेर में दिवाली के मौके पर कुछ ऐसे ही अलग अन्दाज़ में उर्दू में रामायण का वाचन किया जाता है, जिसे सुनकर हर कोई अभिभूत है। इस पर प्रस्तुत है यह स्पेशल रिपोर्ट...

"कब मंदिर से मस्जिद लड़ती है, कब गीता से कुरान, लोग रोटियां सेक रहे हैं लेकर इनका नाम"। जी हां, एक ओर जहां कुछ लोग साम्प्रदायिकता के नाम पर कुछ जातिवाद का जहर घोलते हैं, वहीं बीकानेर में रामायण का उर्दू में वाचन हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे और कौमी एकता का संदेश देता है। उर्दू के अल्फ़ाज़ में रामायण की अदायगी कुछ अलग ही अन्दाज़ है। उर्दू में लिखी उस रामायण का, जिसके शब्दों और तरीके के आजकल बीकानेर में हर तरफ चर्चे हैं। जी हां, बीकानेर में दिवाली पर एक ऐसी रामायण का मंचन वाचन किया जा रहा है, जिसका अन्दाज़-ए-बयां कुछ अनोखा ही है। उर्दू में लिखी रामायण का वाचन यहां के पर्यटन लेखक संघ और महफ़िले अदब पिछले कई सालों से लगातार करते आ रहे हैं।

बीकानेर में वाचन होने वाली इस उर्दू रामायण को सन् 1936 में लख़नऊ के ही मौलवी बादशाह राना लखनवी ने बीकानेर में ही लिखा था, जिसे गोल्ड मेडल से भी नवाज़ा गया था और उर्दू में लिखी छंद की सबसे बेहतरीन रामायण माना जाता है। ख़ास बात यह है कि ये सिर्फ़ नौ पृष्ठ की है, जिसमें छह—छह पंक्तियों के अंदर पूरी रामायण समाई हुई है। दरअसल, 1936 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एक स्पर्धा हुई, जिसके तहत अपनी भाषा में उर्दू लिखना था, तब मौलवी राना ने उर्दू में इस रामायण को लिखा। बीकानेर में राना उस वक़्त बीकानेर के महाराजा गंगासिंह के उर्दू-फ़ारसी के फ़रमान अनुवाद किया करते थे। सबसे ख़ास बात इस रामायण की ये है कि इसको महज़ 30 मिनट में पढ़ा जा सकता है।

सन् 2012 से बीकानेर में इस उर्दू का रामायण का वाचन दीपावली के समय साम्प्रदायिक सौहार्द का संदेश देने के उद्देश्य से होता है। ऐसे में यहां के लोगों में इस रामायण के उर्दू वाचन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। आज भी इस उर्दू में लिखी रामायण का वाचन हुआ। हाजी फरमान अली कहते हैं कि राम हिन्दू मुस्लिम के न होकर सबके है। उन्होंने बताया कि उर्दू रामायण की मूल कॉपी तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन राना पर लिखी किताब को देखकर इसका वाचन किया जाता है, जो हर दिवाली पर करते हैं। वहीं बाक़ी लोग इसे नई पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

बहरहाल, गंगा—जमुनी तहजीब को बीकानेर में साकार कर देने वाली इस उर्दू रामायण वाचन को देखकर किसी शायर की यह दो पंक्तियां कहना लाजमी होगा कि, 'मेरा दावा है सब जहर उतर जाएगा, मेरे शहर में दो दिन ठहर कर तो देखो'।

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