गुरुवार को सुनवाई से पहले सभी पक्षों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच में दस्तावेज सौंप दिए थे। सुनवाई शुरू करते समय प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि मामले में सबसे पहले मुख्य याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जाएंगी। इसके बाद ही बाद में अन्य याचिकाकर्ताओं पर सुनवाई होगी। इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता रामलला, सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा हैं।

प्रमुख न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इस मामले को आस्था नहीं, बल्कि भूमि विवाद के तौर पर देखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि भावनात्मक और राजनीतिक दलीलें नहीं सुनी जाएंगी, यह केवल कानूनी मामला है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में अब किसी नई अर्जी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही जिन लोगों की मौत हो चुकी है, उनका नाम हटाया जा रहा है। यानी अब इस मामले में हाशिम अंसारी का नाम हट जाएगा।

सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा कि इस मामले में अभी कई किताबों का अनुवाद होना बाकी है, जैसे रामचरित मानस। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा कि रामचरित मानस जैसी 10 ऐसी किताबें हैं, जिनको हिन्दू पक्ष अपना आधार बना रहा है। ऐसे में इन किताबों के उन हिस्सों के अनुवाद जरूरी है। क्योंकि ये हिंदी, संस्कृत और पाली भाषाओं में है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील तुषार मेहता ने कहा कि हमारे हिस्से के दस्तावेजों का अनुवाद कर उसे कोर्ट मे दाखिल कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये साफ कर दिया था कि इस मामले की सुनवाई नहीं टाली जाएगी। 5 दिसंबर को हुई सुनवाई में मुस्लिम पक्षकार की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि मामले की सुनावाई के लिए इतनी जल्दी क्यों है? हालांकि विशेष पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह आठ फरवरी से इन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू करेगी और अब इस मामले की सुनवाई में देरी नहीं की जाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई टली, अब 14 मार्च को सुनवाई

Published Date 2018/02/08 05:57, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। अयोध्या के बाबरी मस्जिद और रामजन्म भूमि मामले में आज होने वाली सुनवाई को टाल दिया गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अब 14 मार्च को सुनवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने आज ये साफ करते हुए कहा कि ये मामला केवल जमीनी विवाद का है, इसके अलावा कुछ नहीं है। कोर्ट ने सभी पक्षों को दस्तावेज जमा कराने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 14 मार्च तय की गई है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने   इससे पहले गत वर्ष 5 दिसंबर को हुई सुनवाई में सुन्नी वक्फ बोर्ड और सभी पक्षों की उस अपील को खारिज किया था, जिसमें उन्होंने आम चुनाव के बाद सुनवाई की दलील दी थी।

गुरुवार को सुनवाई से पहले सभी पक्षों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच में दस्तावेज सौंप दिए थे। सुनवाई शुरू करते समय प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि मामले में सबसे पहले मुख्य याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जाएंगी। इसके बाद ही बाद में अन्य याचिकाकर्ताओं पर सुनवाई होगी। इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता रामलला, सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा हैं।

प्रमुख न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इस मामले को आस्था नहीं, बल्कि भूमि विवाद के तौर पर देखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि भावनात्मक और राजनीतिक दलीलें नहीं सुनी जाएंगी, यह केवल कानूनी मामला है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में अब किसी नई अर्जी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही जिन लोगों की मौत हो चुकी है, उनका नाम हटाया जा रहा है। यानी अब इस मामले में हाशिम अंसारी का नाम हट जाएगा।

सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा कि इस मामले में अभी कई किताबों का अनुवाद होना बाकी है, जैसे रामचरित मानस। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा कि रामचरित मानस जैसी 10 ऐसी किताबें हैं, जिनको हिन्दू पक्ष अपना आधार बना रहा है। ऐसे में इन किताबों के उन हिस्सों के अनुवाद जरूरी है। क्योंकि ये हिंदी, संस्कृत और पाली भाषाओं में है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील तुषार मेहता ने कहा कि हमारे हिस्से के दस्तावेजों का अनुवाद कर उसे कोर्ट मे दाखिल कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये साफ कर दिया था कि इस मामले की सुनवाई नहीं टाली जाएगी। 5 दिसंबर को हुई सुनवाई में मुस्लिम पक्षकार की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि मामले की सुनावाई के लिए इतनी जल्दी क्यों है? हालांकि विशेष पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह आठ फरवरी से इन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू करेगी और अब इस मामले की सुनवाई में देरी नहीं की जाएगी।

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