प्रतापगढ़ में भारी बारिश के चलते लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त

Published Date 2018/06/29 11:26, Written by- FirstIndia Correspondent

प्रतापगढ़। राजस्थान के प्रतापगढ़ में भारी बारिश के चलते हालात खराब हो गए। यहां कई गांव बारिश के बीच टापू बन गए है। नदियां उफान पर आने से कई रास्ते बंद हो गए और लोग गांवों में ही फंसे रहे है।

कई जगह बच्चे स्कूल नहीं जा पाए तो कही जगह बसों की आवाजाही भी ठप्प हो गई। इधर कई कोलोनियों में ऐसा जल भराव हुआ कि लोगों का घर से बाहर निकलना ही मुहाल हो गया। दरअसल प्रतापगढ़ जिले में रोज बारिश का दौर चल रहा है। पिछले चार दिनों में हुई भारी बरसात से पांचली नदी, रोजड नदी, शिवना नदी और जाखम नदी उफान पर है। नदियों के रास्ते में आने वाले पूल बंद हो चले हैं, और आवाजाही ठप्प हो गई है।

पांचली नदी उफान पर आने से पारसोला-नरवाली-बांसवाडा मार्ग, शिवना नदी उफान पर होने से अरनोद-चुपना-मंदसौर मार्ग, जाखम नदी उफान पर होने से धोलापानी-कालाकोट मार्ग बंद हो गए। इस प्रकार अन्य नदी-नालों के उफान पर होने से कई रास्ते बंद हो गए। कई गांवों का तो जिला मुख्यालय से ही संपर्क टूट गया। एक अनुमान के तहत जिले के करीब तीस गांव जिला मुख्यालय से काफी देर कटे रहे। जिले के सैंकडो गांव प्रभावित हुए और लोगों को पानी कम होने का इंतज़ार करना पड़ा। कई गांवों में बच्चे सुबह स्कूल नहीं हो गए तो वहीं इलाज हेतु मरीज भी परेशान दिखे।

इधर जिले के पारसोला और मुंगाणा इलाके में कई जगह कोलोनियों में पानी भर जाने से लोग परेशान हो गए। कोलोनियों में जल भराव के चलते आम जिंदगी मानों ठप्प हो गई हो। वाहनों की आवाजाही भी बुरी तरह प्रभावित हुई।

दूसरी ओर बारिश के बीच सभी जलाशयों में भरपूर पानी की आवक से किसानों में खुशी की लहर भी है। आम तौर पर जुलाई माह में ही इस तरह की भारी बारिश देखने को मिलती है, लेकिन इस बार लगता है कि कुदरत कुछ ज्यादा ही मेहरबान है। प्रतापगढ़ जिला राजस्थान का दक्षिणी जिला है, यह मध्यप्रदेश के मंदसौर, रतलाम और नीमच जिलों से लगता है। यह अपने सघन वन क्षेत्र और उन्नत प्रकृति के लिए जाना जाता है। यहां हर साल राजस्थान के अन्य हिस्सों की तुलना में ज्यादा बारिश होती है।
 

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