सीमावर्ती जिले जैसलमेर में बढ़ने लगे शिकार के मामले, लाचार बना वन विभाग

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/01/02 06:20

जैसलमेर। लम्बे चौड़े भू-भाग में फैला सीमावर्ती जिला जैसलमेर पर्यटन नगरी होने के साथ ही विभिन्न प्रकार के वन्य जीवों की शरणस्थली भी माना जाता है। यहां के स्थानीय वन्यजीवों के साथ यहां पर प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों का भी आना जाना लगा रहता है। वन्यजीवों के संरक्षण और उनकी देखभाल के लिये सरकार द्वारा जिले के बड़े भू-भाग को राष्ट्रीय मरू उद्यान घोषित किया गया है, ताकि यहां पर वन्यजीवों की बेहतर देखभाल की जा सके।

हिरण की विभिन्न प्रजातियों के साथ ही खरगोश सहित राज्य पक्षी गोडावण व अन्य कई पक्षी इस मरू उद्यान में शरण लिये हुए हैं। इतना ही नहीं, कई प्रवासी पक्षी भी हर साल नियमित रूप से जैसलमेर की ओर आते हैं। पिछले कुछ सालों में पर्यटन के विकास के साथ साथ यहां पर शिकार की घटनाओं में भी इजाफा हुआ है, जिसमें पर्यटकों के साथ साथ कई स्थानीय लोगों द्वारा भी शिकार की घटनाएं की जाती है, लेकिन वन विभाग के पास सीमित संसाधन होने के चलते विभाग शिकारियों तक पहुंच नहीं पाता है।

दूर दूर तक पसरा रेगिस्तान और ठण्ड का मौसम शिकारियों के लिये सबसे अधिक बेहतर तालमेल होता है और इन दिनों ये दोनों ही संयोग जैसलमेर जिले में देखे जा सकते हैं। लिहाजा, सर्दी को दूर करने के लिये बड़ी संख्या में शिकारी जैसलमेर के सुनसान इलाकों में भ्रमण करते देखे जा सकते हैं। इस मौसम में शिकारियों के लिये सबसे बेहतरीन शिकार साईबेरियन बर्ड जिसे स्थानीय भाषा में तिलोर कहा जाता है वह मानी जाती है।

जानकारी के अनुसार, साईबेरिया इलाके में इन दिनों पड़ने वाली अधिक ठंड से बचने के लिये यह पक्षी उड़कर जैसलमेर की ओर आते हैं तथा यहां शरण लेते हैं। ठण्ड कम होने के साथ ही ये पक्षी वापिस उड़कर अपने पुराने ठिकानों पर चले जाते हैं, लेकिन जिस सुरक्षित माहौल की तलाश में ये पक्षी यहां आते हैं, वह इन दिनों यहां रहा नहीं है। साईबेरियन बर्ड के यहां आने की शुरूआत के साथ ही शिकारी भी इनके भक्षण की पूरी तैयारी कर लेते हैं। यही कारण है कि किसी जमाने में बडी संख्या में दिखाई देने वाले इस पक्षी के झुंड अब सिमटने लगे हैं और कभी प्रचुर संख्या में दिखने वाला यह पक्षी अब कम ही दिखाई देता है। 

जैसलमेर जिले में पर्यटन के बढ़ने के साथ ही लम्बे चौडे भू-भाग की निगरानी में आने वाली परेशानियां देश विदेश के शिकारियों को यहां आमंत्रित करती है। ऐसे में सर्दी के मौसम मेे कई देशी-विदेशी शिकारी यहां के रैतीले इलाकों में शिकार के लिये विचरण करते देखे जा सकते हैं। चूंकि स्थानीय लोगों के सहयोग के साथ ये लोग शिकार करते हैं। इसलिये इन शिकारियों को पकड़ पाना वन विभाग के लिये टेढ़ी खीर हो जाता है।

वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो जैसलमेर जिले का इलाका लम्बा चौड़ा है। साथ ही वन विभाग के पास स्टाफ की कमी व पूरे संसाधन नहीं होने से शिकारियों पर पैनी नजर नहीं रखी जा सकती है। वहीं दूसरी ओर, स्थानीय लोगों के साथ की वजह से इन शिकारियों की शिकायत भी नहीं हो पाती है। इसलिये वन विभाग को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती है।

वन्य अधिकारियों का यह भी कहना है कि विभाग द्वारा लगातार शिकार रोकने के प्रयास किये जा रहे हैं और सूचना मिलने पर त्वरित कार्यवाही भी होती है। लेकिन सूचनाएं समय पर नहीं मिलना सबसे बड़ी बिडंबना है। उनका कहना है कि आगामी दिनों में नई कार्ययोजना के साथ शिकारियों पर नजर रखने की रणनीति बनाई जाएगी, ताकि इलाके में स्वच्छंद विचरण करने वाले वन्य जीवों की सुरक्षा की जा सके।

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