14 या 15 अगस्त किस दिन और कैसे मनाएं जन्माष्टमी

Published Date 2017/08/13 04:02, Written by- FirstIndia Correspondent

ये तो हम सब जानते है कि भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्य रात्रि को भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल इस तिथि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। लेकिन इस साल जन्माष्टमी को लेकर एक पेच फंस गया है और लोग उलझन में हैं कि जन्माष्टमी की सही तिथि और मुहूर्त क्या है।

सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों के लिए है जो जन्माष्टमी के दिन व्रत रखते हैं। इस उलझन की वजह यह है कि 14 अगस्त को पूरे दिन सप्तमी तिथि है। लेकिन शाम 7 बजकर 35 मिनट से अष्टमी तिथि का आरंभ हो जा रहा है। जबकि अष्टमी तिथि 15 अगस्त को पूरे दिन है और शाम 5 बजकर 42 पर नवमी तिथि लग रही है। अष्टमी तिथि का दो दिन लग जाना लोगों को उलझन में डाले हुए है।

दूसरी उलझन के बारे में पंडित बालकृष्ण मिश्र बताते हैं कि भाद्रपद पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र में भगवान कृष्ण की जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस साल 14 अगस्त की मध्य रात्रि 12 बजे अष्टमी पड़ रही है, लेकिन उस समय भरणी नक्षत्र है। जबकि भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ है। इसलिए तिथि और नक्षत्र एक साथ नहीं होने की वजह से भ्रम है।

शास्त्रों इस तरह की उलझनों के लिए एक आसान सा उपाय बताया गया है कि गृहस्थों को उस दिन व्रत रखना चाहिए जिस रात अष्टमी तिथि लग रही हो। इसके अनुसार 14 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रख सकते हैं। जो लोग वैष्णव और साधु संत हैं वह 15 अगस्त को अष्टमी तिथि में व्रत रख सकते हैं।

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