दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से उसे 22 जनवरी तक सूचित करने को कहा कि क्या विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिये राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को कोई अंतिम पत्र भेजा गया है। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने साफ कर दिया कि वह कोई आदेश देने या नोटिस जारी करने नहीं जा रही हैं और चुनाव आयोग से उनके द्वारा पूछे गए सवालों पर स्पष्टीकरण देने को कहा है।

बहरहाल, ऐसे में अब सबकी नजरें राष्ट्रपति पर हैं, जो इस मामले पर अंतिम मुहर लगाएंगे। वह अगर आयोग की अनुशंसा पर इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने का आदेश जारी करते हैं, तो दिल्ली में इन सीटों पर दोबारा चुनाव की नौबत आ सकती है। हालांकि यह तय है कि 20 विधायकों की सदस्यता चले जाने की स्थिति में भी 67 सीटों के बंपर बहुमत के साथ सत्ता में आई केजरीवाल सरकार बची रहेगी।

वहीं दूसरी ओर, इस मामले में आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर पलटवार किया है। आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति का 23 जनवरी को जन्मदिन है। वह 65 साल के हो रहे हैं और ज्योति रिटायर होने से पहले पीएम मोदी का कर्ज उतारना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग में आप के किसी विधायक की गवाही नहीं हुई है।

आपको बता दें कि यह मामला आम आदमी पार्टी सरकार के दौरान बनाई गई रोगी कल्याण समिति में अध्यक्ष पद पर तैनात किए गए 27 विधायकों से जुड़ा हुआ है। रोगी कल्याण समिति एक एनजीओ की तरह काम करती है, जो अस्पतालों के प्रबंधन से जुड़ी है। इसमें इलाके के सांसद, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और स्वास्थ्य अधिकारी शामिल होते हैं।

जानकारी के अनुसार इस मामले में कानून के एक छात्र विभोर आनंद ने शिकायत की थी। उसके बाद यह मामला राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। राष्ट्रपति से चुनाव आयोग के पास यह मामला आया, जिसके बाद चुनाव आयोग इन विधायकों को नोटिस भेजा। इस मामले में भी कार्यवाही चल रही है और फिलहाल मामला कानून मंत्रालय में पड़ा हुआ है।

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दिल्ली में केजरीवाल सरकार पर संकट का साया, चुनाव आयोग ने 20 एमएलए को अयोग्य बताया

Published Date 2018/01/20 12:35, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर एक बार फिर से संकट का साया दिखाई दे रहा है, जिसके चलते केजरीवाल सरकार मुसीबत में आ सकती है। चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया है और इसकी सिफारिश राष्ट्रपति से कर दी है। इन विधायकों को दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने संसदीय सचिव नियुक्त किया था। वहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने भी आज आप विधायकों को राहत देने के लिये कोई भी अंतरिम आदेश देने से मना कर दिया है।

चुनाव आयोग ने कथित तौर पर लाभ का पद रखने के लिये इन विधायकों को अयोग्य ठहराने की सिफारिश राष्ट्रपति को की है। चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति को आप के 20 विधायकों को अयोग्य ठहराने की सिफारिश की है। ऐसे में पार्टी के पास केवल कोर्ट से राहत की उम्मीद थी, जिस पर पार्टी को दिल्ली हाईकोर्ट से फौरी राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि विधायक चुनाव आयोग के सामने बुलाने पर भी नहीं गए। मामले की सुनवाई की तारीख लगा दी गई है। 

दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से उसे 22 जनवरी तक सूचित करने को कहा कि क्या विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिये राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को कोई अंतिम पत्र भेजा गया है। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने साफ कर दिया कि वह कोई आदेश देने या नोटिस जारी करने नहीं जा रही हैं और चुनाव आयोग से उनके द्वारा पूछे गए सवालों पर स्पष्टीकरण देने को कहा है।

बहरहाल, ऐसे में अब सबकी नजरें राष्ट्रपति पर हैं, जो इस मामले पर अंतिम मुहर लगाएंगे। वह अगर आयोग की अनुशंसा पर इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने का आदेश जारी करते हैं, तो दिल्ली में इन सीटों पर दोबारा चुनाव की नौबत आ सकती है। हालांकि यह तय है कि 20 विधायकों की सदस्यता चले जाने की स्थिति में भी 67 सीटों के बंपर बहुमत के साथ सत्ता में आई केजरीवाल सरकार बची रहेगी।

वहीं दूसरी ओर, इस मामले में आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर पलटवार किया है। आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति का 23 जनवरी को जन्मदिन है। वह 65 साल के हो रहे हैं और ज्योति रिटायर होने से पहले पीएम मोदी का कर्ज उतारना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग में आप के किसी विधायक की गवाही नहीं हुई है।

आपको बता दें कि यह मामला आम आदमी पार्टी सरकार के दौरान बनाई गई रोगी कल्याण समिति में अध्यक्ष पद पर तैनात किए गए 27 विधायकों से जुड़ा हुआ है। रोगी कल्याण समिति एक एनजीओ की तरह काम करती है, जो अस्पतालों के प्रबंधन से जुड़ी है। इसमें इलाके के सांसद, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और स्वास्थ्य अधिकारी शामिल होते हैं।

जानकारी के अनुसार इस मामले में कानून के एक छात्र विभोर आनंद ने शिकायत की थी। उसके बाद यह मामला राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। राष्ट्रपति से चुनाव आयोग के पास यह मामला आया, जिसके बाद चुनाव आयोग इन विधायकों को नोटिस भेजा। इस मामले में भी कार्यवाही चल रही है और फिलहाल मामला कानून मंत्रालय में पड़ा हुआ है।

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