जानिए कैसे एक आंगनबाड़ी सहायिका बनी नशे की तस्कर

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/06/01 08:13

डीडवाना(नरपत ज़ोया)। नशे का गौरखधंधा वाकई सुरक्षा एजेंसियों के लिए काफी बड़ी चुनौती है। नशे के सौदागरों को बस मतलब होता है खुद की जेब गर्म करने से फिर इसके लिए चाहे किसी भी कानून को ताक में रखना पड़े। ऐसी ही कहानी है नशे की सौदागर शकीना की। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर सीधी साधी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शकीना कैसे बनी नशे की सौदागर। 

शक्ल सूरत से भोली भाली सीधी साधी दिखने वाली इस महिला के पीछे छिपा है नशीले मादक पदार्थो की तस्करी करने वाली तस्कर का वो चेहरा जो नशे के कारोबार से जुड़े एक अंतरराज्यीय गिरोह की सदस्य है जो राजस्थान के प्रतापगढ़, हनुमानगढ़, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश के मंदसौर, रतलाम और नीमच के अफीम उत्पादक क्षेत्र से देश के कई हिस्सों में नशे का सप्लाई का कारोबार करती है। प्रतापगढ़ से हथुनिया से गिरफ्तार कर आज इसे डीडवाना के कोर्ट में पेश किया गया। 

धार्मिक स्थानों को भी बनाया ट्रांजिट स्टेशन

शकीना ने नशे के गौरखधंधे के लिए धार्मिक स्थानों को भी काम मे लिया और अजमेर की प्रसिद्ध ख्वाजा साहब की दरगाह के आसपास और सालासर में एक मेडिकल स्टोर को अपना ट्रांजिट स्टेशन बना रखा था। यहां से वो अपना तस्करी का गौरखधंधा स्थानीय सहायकों की मार्फ़त अफीम ,चरस, कोकीन हेरोइन सप्लाई का करती थी। जनवरी 2018 में शिमला गांव से भंवरलाल शर्मा को करोड़ो की खेप के साथ गिरफ्तार किया था उसकी पूछताछ के बाद नशे की सौदागर शकीना को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल हुई ।

महिला होने का उठाया फायदा

शकीना प्रतापगढ़ के हथुनिया थाना क्षेत्र के बागलिया जो नशे के कारोबार के लिए कुख्यात है यहां से नशे का कारोबार चलता है। शकीना का भाई भी मादक पदार्थों की तस्करी करता था। बड़ी खेप तीन किलो मादक पदार्थों के साथ पकड़ा गया और अभी प्रतापगढ़ जेल में बंद है। भाई के जेल जाने के बाद शकीना भाई के साथ काम करने वाले तस्करों के सम्पर्क में आई। उन्होंने शकीना के दिव्यांग और महिला होने का फायदा उठाते हुए सप्लायर बना लिया और एक सीधी साधी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नशे की सौदागर बन गई। 

नशे का कारोबार करने वालेे लोग ऐसे ही भोले भाले लोगों को अपने जाल मेंं फंसाकर कारोबार करते है। इस कारोबार में कई अनमोल जिंदगियां बर्बाद हो जाती है तो कई नासमझ नशे की दलदल में घुसकर अपना जीवन नारकीय बना लेते है। यही अंजाम शकीना और उनके साथियों का होना है मगर यह उस नशे के नेटवर्क के अंतिम लोग है। मुख्य सरगना तक पंहुचना होगा ताकि नशे के मदहोशी में डूबते समाज को बचाया जा सके ।

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