विश्वकर्मा जयंती: ऐसे और इस समय करें पूजा, पूरी होगी हर मनोकामना

Published Date 2017/09/17 12:10, Written by- FirstIndia Correspondent

रविवार को सृष्टि के सबसे बड़े इंजीनियर और वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा जयंती है| विश्वकर्मा पूजा पूरे देश में तमाम कारखानों, मंदिरों और घरों आदि पर किया जा रहा है। मान्यता के अनुसार पौराणिक संरचनाएं भगवान विश्वकर्मा ने किया था, इसी के चलते उन्हें निर्माणकर्ता कहा कहा है| इस समस्त ब्रह्मांड की रचना भी विश्वकर्मा जी के हाथों से हुई है। ऋग्वेद के 10वे अध्याय के 121वे सूक्त में लिखा है कि विश्वकर्मा जी के द्वारा ही धरती, आकाश और जल की रचना की गई है। विश्वकर्मा पुराण के अनुसार आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्मा जी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की।

पंचांग के अनुसार आज दोपहर 12:54 बजे तक ही विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त है| इसी समय के अनुसार पूजन शुभकारी होगा| भगवान विश्वकर्मा की पूजा और यज्ञ विशेष विधि-विधान से होता है| इसकी विधि यह है कि यज्ञकर्ता पत्नी सहित पूजा स्थान में बैठे| इसके बाद विष्णु भगवान का ध्यान करे| तत्पश्चात् हाथ में पुष्प, अक्षत लेकर मंत्र पढ़े और चारों ओर अक्षत छिड़के| अपने हाथ में रक्षासूत्र बांधे एवं पत्नी को भी बांधे| पुष्प जलपात्र में छोड़े| इसके बाद हृदय में भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें| दीप जलायें, जल के साथ पुष्प एवं सुपारी लेकर संकल्प करें|

शुद्ध भूमि पर अष्टदल कमल बनाए| उस पर जल डालें| इसके बाद पंचपल्लव, सप्त मृन्तिका, सुपारी, दक्षिणा कलश में डालकर कपड़े से कलश की तरफ अक्षत चढ़ाएं| चावल से भरा पात्र समर्पित कर विश्वकर्मा बाबा की मूर्ति स्थापित करें और वरुण देव का आह्वान करें| पुष्प चढ़ाकर कहना चाहिए- ‘हे विश्वकर्माजी, इस मूर्ति में विराजिए और मेरी पूजा स्वीकार कीजिए|’ इस प्रकार पूजन के बाद विविध प्रकार के औजारों और यंत्रों आदि की पूजा कर हवन यज्ञ करें|

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