मदरसा बोर्ड को मिलेगा कानूनी दर्जा

Published Date 2018/06/28 02:51,Updated 2018/06/28 07:04, Written by- FirstIndia Correspondent

जयपुर। अब मदरसा तालीम को नई दिशा मिलेगी। मदरसा बोर्ड का नया कानून बनने जा रहा है। इसके लिए ड्रॉफ्ट तैयार किया गया है और उसके लिए आपत्तियां व सुझाव मांगे गए हैं। इस ड्रॉफ्ट के मुताबिक जहां मदरसा बोर्ड चेयरमैन व सदस्यों का चुनाव एक तय फॉरमेट होगा, वहीं बोर्ड के सभी सदस्य निर्धारित मापदंड से चुने जाएंगे। उम्मीद की जा रही है कानून बनने के बाद मदरसा तालीम में आने वाली अड़चनें दूर होंगी, मदरसा पैराटीचर्स के हित में फैसले लिए जा सकेंगे, मदरसों में दी जाने वाली तालीम में सुधार हो सकेगा।

गौरतलब है कि अब तक मदरसा बोर्ड राजस्थान सरकार के तहत संचालित है, इसके नियम व कानून नहीं होने से कई बार बड़े फैसले में लेने में काफी दिक्कतें आती हैं। साथ ही कई मामलों में लिए गए फैसलों में लचीलापन भी होता है। जिसका सीधा असर मदरसा तालीम और उसमें पढ़ा रहे पैराटीचर्स पर पड़ता है। नया कानून बनने के बाद बोर्ड खुद बड़े फैसले ले सकेगा और मदरसा तालीम को नई ऊंचाई तक पहुंचने में मदद मिलेगी। नये कानून में खास तौर पर मदरसा बोर्ड चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्ति पर जोर दिया गया है, जिसमें चेयरमैन का जाना माना शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता होना जरूरी होगा। चेयरमैन की नियुक्ति राज्य सरकार के स्तर पर होगी।

ये हैं मदरसा बोर्ड बिल 2018 की खास बातें
- बोर्ड का कार्यकाल 3 साल का होगा।
- चेयरमैन की नियुक्ति भी 3 साल के लिए सरकार करेगी।
- अल्पसंख्यक मामलात सचिव, वित्त सचिव, स्कूल शिक्षा सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव, अल्पसंख्यक मामलात निदेशक, प्राथमिक शिक्षा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा निदेशक, राज्य शिक्षा शोध काउंसिल निदेशक, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सचिव, पाठ्य पुस्तक मंडल एमडी, वक्फ बोर्ड सीईओ रहेंगे मदरसा बोर्ड के मानद सदस्य।
- किसी भी राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय एक-एक उर्दू व अरबी के शिक्षक भी होंगे सदस्य।
- छह मदरसा प्रबंधन कमेटियों के सदर और चार सामाजिक कार्यकर्ता भी सदस्य के तौर पर मनोनीत किए जाएंगे।
- बोर्ड की सालाना मीटिंग हर साल जुलाई में होगी।
- जिला स्तर पर मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की होगी।
 

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