माहे रमजान : हिन्दू भी रख रहे हैं सरहद पर रोजे

Published Date 2018/05/30 04:14,Updated 2018/05/31 03:13, Written by- FirstIndia Correspondent

बाड़मेर। देश मे गौरक्षा, लव जिहाद जैसे कई मुद्दों को लेकर आए दिन साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश होती है। यंहा तक की हमारे नेता भी हिन्दू-मुस्लिम समुदाय के बीच नफरत की भावना पैदा करने के लिए आए दिन भड़काऊ भाषण देकर माहौल खराब करने की कोशिश करते है। लेकिन बाड़मेर जिले में मुस्लिम भाइयो के साथ हिन्दू भी पांच रोजे रखकर भाईचारे की मिसाल पेश कर रहे है।

रेगिस्तान के बाड़मेर जिले में आसमान से आग के गोले बरस रहे है। यंहा तक की यंहा का तापमान भी करीब 47 डिग्री के आसपास है। उसके बावजूद भी रमजान के पाक महीने में मुसलमानो के साथ हिन्दू भी रोजे रखकर हिन्दू-मुस्लिम समुदाय के बीच आपसी भाईचारे का अनोखा सन्देश दे रहे है । दरअसल सरहद पर बसे इस गांव का नाम है। गोहड़ का तला। इस गांव में बनी ये दरगाह हजरत सैय्यद कासम शाह मराटी की है। मान्यता है कि इस दरगाह के साथ यंहा के हिंदुओं की आस्था जुड़ी हुई है। 

इसी के चलते रमजान के इस पाक महीने में मुसलमान के साथ साथ यंहा हिन्दू भी पांच रोजे रख रहे है। यंहा के कुछ हिंदू ऐसे है जो जितनी शिद्दत से नवरात्रि के दौरान व्रत रखते हैं, उतना ही रमजान में रोजे रखकर अपने मुस्लिम भाइयों के साथ नमाज पढ़ने में भी पीछे नहीं रहते है। यंहा तक की दरगाह में जाकर जियारत करने के बाद मुस्लिम भाइयों के साथ रोजा खोलकर उनकी खुशी को दोगुना भी कर रहे है। रोजा रखने वाले हिन्दू समुदाय के खेमाराम और मोहन बताते है की हम पिछले कई सालों से रोजा रख रहे है। क्योंकि हमारी आस्था दरगाह हजरत सैय्यद कासम शाह मराटी से जुड़ी हुई है। 

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