मायावती ने खेला 'नया पैंतरा', भाई की बजाय भीमराव अंबेडकर को बनाया राज्यसभा प्रत्याशी

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/03/07 01:21

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा सीट पर होने वाले चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने आज तमाम अटकलों को विरात देते हुए बसपा के राज्‍यसभा उम्‍मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। मायावती ने पार्टी के वफादार कार्यकर्ता और पूर्व विधायक भीमराव अंबेडकर को राज्यसभा चुनावों के लिए उम्मीदवार बनाए जाने का ऐलान किया है। ऐसे में मायावती ने भीमराव अंबेडकर को राज्यसभा प्रत्याशी घोषित कर ये संकेत देने का प्रयास किया है कि बसपा में परिवारवाद की कोई जगह नहीं है।

मंगलवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ के मॉल एवन्यू स्थित पार्टी मुख्यालय में विधायकों एवं पार्टी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी, जिसमें उन्होंने भीमराव अंबेडकर को राज्यसभा के लिए पार्टी प्रत्याशी बनाए जाने के लिए उनके नाम की घोषणा की। गौरतलब है कि इससे पूर्व ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि मायावती के भाई आनंद सिंह को राज्यसभा के लिए बसपा प्रत्याशी बनाया जा सकता है, लेकिन मायावती ने चर्चाओं को विराम देते हुए भीमराव अंबेडकर के नाम का ऐलान किया है।

बैठक के बाद मायावती ने कहा कि उन्होंने यह फैसला लेकर भाजपा एंड कंपनी द्वारा फैलाई जा रही उन अफवाहों पर विराम लगा दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि वह पार्टी के उपाध्यक्ष व उनके छोटे भाई आनंद कुमार को राज्यसभा भेजना चाहती हैं। उन्होंने साफ किया कि आनंद कुमार पार्टी के राजनीतिक नहीं, सिर्फ एग्जीक्यूटिव काम देखते हैं। बार-बार सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि आनंद कुमार पहले की तरह ही नि:स्वार्थ भाव से काम करते रहेंगे। वह राजनीति के चक्कर में नहीं पड़ेंगे और कभी सांसद, विधायक या मंत्री नहीं बनेंगे।

बहुजन समाज पार्टी की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि BSP को इस संकल्प को पूरी तरह से निर्वहन करते हुए आनंद कुमार को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने के बावजूद भी संसद में ना तो पहले भेजा गया है और ना अभी जा जा रहा है। ऐसे पूरी तरह से गलत, बेबुनियाद खबर बीएसपी को बदनाम करने की मीडिया की जातिवादी मानसिकता का पर्दाफाश भी होता है और साथ ही आम जनता में मीडिया की अपनी विश्वसनीयता पर भी सौ प्रश्न लगते हैं।

आपको बता दें कि भीमराव अंबेडकर कानपुर मंडल के अंतर्गत जिला इटावा के रहने वाले हैं और वह इटावा की लखना विधानसभा सीट से विधायक भी रह चुके हैं। अंबेडकर इटावा जिले से 2007 में बीएसपी की टिकट से विधानसभा चुनाव जीतकर पहुंचे थे। इसके बाद 2017 विधानसभा चुनाव में में उन्हें औरैया सीट से बीएसपी का प्रत्याशी बनाया गया था, लेकिन ये चुनाव हार गए थे।

इसके साथ ही वह काशीराम के सहयोगी रहे हैं। बीएसपी संस्थापक कांशीराम ने 1991 में जब सपा के सहयोग से इटावा लोकसभा से संसदीय का चुनाव जीता था, उस समय से भीमराव पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता गिने जाते हैं। भीमराव पेशे से वकील हैं और उन्होंने 'अंबेडकर के आर्थिक विचार और वर्तमान में उनकी उपयोगिता' सब्जेक्ट पर कानपुर विश्वविद्यालय में शोधग्रंथ प्रस्तुत किया था, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें डिग्री नहीं दी गई।

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