बता दें कि नवजोत सिंह और रुपिंदर सिंह ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने नवजोत सिंह को तीन साल की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ इन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, सुप्रीम कोर्ट ने 18 अप्रैल को इनकी याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ जज चेलेमेश्वर और संजय किशन कौल की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने मंगलवार को इस मामले पर में फैसला सुनाया। जे चेलमेश्वर और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने कहा कि सिद्धू भादसं की धारा 323 के तहत मारपीट करने के दोषी हैं और इस अपराध के लिए उन पर एक हजार रुपये का जुर्माना किया जाता है। पीठ ने इस मामले में दूसरे आरोपी रुपिंदर सिंह काे बरी कर दिया। सिद्धू को इस तरह पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा दी गई तीन साल कैद और एक लाख जुर्माना की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

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30 साल पुराने रोडरेज मामले में सिद्धू को मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी

Published Date 2018/05/15 12:28, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। 30 साल पुराने रोडरेज के एक मामले में पूर्व क्रिकेटर एवं पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इस मामले में कोर्ट ने सिद्धू को गैर इरादतन हत्‍या के आरोप से बरी कर दिया, वहीं उन पर मारपीट के लिए जुर्माना लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की 3 साल की सजा को किया खारिज करते हुए सिद्धू की अपील को मंजूर किया और इस मामले में महज एक हजार जुर्माना लगाकर छोड़ दिया है।

गौरतलब है कि नवजोत सिंह सिद्धू और उनके एक साथी रुपिंदर सिंह संधू पर सड़़क पर एक युवक के साथ मारपीट किए जाने का आरोप है, जिसकी बाद में मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को मारपीट का दोषी तो करार दिया, लेकिन गैर इरादतन हत्‍या के अारोप से बरी कर दिया। इस तरह सिद्धू को अपनी राजनीतिक पारी में बड़ा जीवनदान मिला है। अब वह अपनी सियासी पारी में अपनी पारी का नए सिरे से आगाज कर सकेंगे।

बता दें कि नवजोत सिंह और रुपिंदर सिंह ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने नवजोत सिंह को तीन साल की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ इन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, सुप्रीम कोर्ट ने 18 अप्रैल को इनकी याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ जज चेलेमेश्वर और संजय किशन कौल की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने मंगलवार को इस मामले पर में फैसला सुनाया। जे चेलमेश्वर और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने कहा कि सिद्धू भादसं की धारा 323 के तहत मारपीट करने के दोषी हैं और इस अपराध के लिए उन पर एक हजार रुपये का जुर्माना किया जाता है। पीठ ने इस मामले में दूसरे आरोपी रुपिंदर सिंह काे बरी कर दिया। सिद्धू को इस तरह पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा दी गई तीन साल कैद और एक लाख जुर्माना की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

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