कहा जाता है कि श्राद्ध पक्ष मे पितृ धरती पर उतर आते है और श्रादपक्ष मे पितृो का तर्पण करने वह प्रसन्न होते है| आशिर्वाद देते है जिससें परिवारों मे सम्पन्नता आती है, सुख-समृद्धि मे बढोत्तरी होती है| साथ ही इसका उद्देशय बताते हुये आयोजक पंडित पवन सागर ने कहा कि वर्तमान के भौतिक युग मे लोग श्राद्ध और पितृ तर्पण से दूर हो रहे है और सभी जातियों को एक साथ लेकर उनके पितृों का तर्णन कराकर सनातन धर्म की एक माला मे पिरोना है|

हम आपकों बता दे व्यक्तिगत रूप से पडिंतों व विद्वानों के सानिध्य मे अपने पुर्वजों की शान्ति के लिये सम्पूर्ण श्राद्ध पक्ष के दौरान लोग अपने-अपने तरीकें से तर्पण कर उन्हे श्रद्धांजलि देते है, लेकिन डॉ. पंडित पवन सागर के नेतृत्व मे टोंक शहर के पण्डितों ने सभी जातियों को एक साथ लाकर ना सिर्फ उनके पुर्वजों और देवताओं बल्कि देश के लिये अपनी जान न्यौछावर करने वाले शहीदों के लिये भी तर्पण किया| शहर की बनास नदी के फ्रेजर ब्रिज के पास तट पर तीन चरणों हजारों शहर वासियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी और उनकी आत्मा की शान्ति के लिये नदी के जल खडे होकर तर्पण किया|

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पितृ पक्ष अमावस्या: राजस्थान के इस जिले में अपने पूर्वजों संग शहीद को भी दी श्रद्धांजलि

Published Date 2017/09/19 02:00, Written by- FirstIndia Correspondent

टोंक | श्राद्ध पक्ष में शास्त्र सम्मत तरीके से अपने पुर्वजों का तर्पण करना जितना आम है उतना ही उसके लिये आचार्यो की मोटी दक्षिणा सहित हजारों रूपये का खर्च होना है| लेकिन टोंक की जीवनदायनी नदी बनास मे रविवार को सनातन धर्म से जुडी सभी जातियों के लिये निःशुल्क तर्पण का आयोजन किया गया| जिसमें सभी वर्गाे से जुडे हजारों लोग ना सिर्फ शामिल अपने पूर्णजो और देवताओं के साथ-साथ देश की रक्षा में शहीद होने वाले जवानों को भी श्रद्धांजलि देते हुये तर्पण किया|
 
टोंक की बनास नदी पर भले ही पिछले एक दशक से बजरी खनन और उस पर चलती सैंकडों पोकलेंड मशीन के लिये जानी जाने लगी है| मंगलवार को बनास नदी के तट पर हिन्दू समाज से जुडे सभी वर्गाे के लिये आयोजित सर्वजातिय निःशुल्क तर्पण का आयोजन खासा चर्चा मे रहा, क्योंकि जहां सनातन धर्म को छूआ-छूत और ऊंच-नीच से जोड़ा जाता है| यह आयोजन अपने मे आप में खास है| दरअसल सनातन धर्म के अनुयायी हिन्दू समाज की श्राद्ध पक्ष में यह मान्यता है कि इस दौरान अपने पुर्वजों की आत्मा की शान्ति के लिये पितृ तर्पण किया जाता है|

कहा जाता है कि श्राद्ध पक्ष मे पितृ धरती पर उतर आते है और श्रादपक्ष मे पितृो का तर्पण करने वह प्रसन्न होते है| आशिर्वाद देते है जिससें परिवारों मे सम्पन्नता आती है, सुख-समृद्धि मे बढोत्तरी होती है| साथ ही इसका उद्देशय बताते हुये आयोजक पंडित पवन सागर ने कहा कि वर्तमान के भौतिक युग मे लोग श्राद्ध और पितृ तर्पण से दूर हो रहे है और सभी जातियों को एक साथ लेकर उनके पितृों का तर्णन कराकर सनातन धर्म की एक माला मे पिरोना है|

हम आपकों बता दे व्यक्तिगत रूप से पडिंतों व विद्वानों के सानिध्य मे अपने पुर्वजों की शान्ति के लिये सम्पूर्ण श्राद्ध पक्ष के दौरान लोग अपने-अपने तरीकें से तर्पण कर उन्हे श्रद्धांजलि देते है, लेकिन डॉ. पंडित पवन सागर के नेतृत्व मे टोंक शहर के पण्डितों ने सभी जातियों को एक साथ लाकर ना सिर्फ उनके पुर्वजों और देवताओं बल्कि देश के लिये अपनी जान न्यौछावर करने वाले शहीदों के लिये भी तर्पण किया| शहर की बनास नदी के फ्रेजर ब्रिज के पास तट पर तीन चरणों हजारों शहर वासियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी और उनकी आत्मा की शान्ति के लिये नदी के जल खडे होकर तर्पण किया|

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