सेहत के लिए खतरनाक है प्लास्टिक 

Published Date 2018/07/04 10:26, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। वर्तमान समय में हम सभी प्लास्टिक का बहुत उपयोग करते है, चाहे वो लंच बॉक्स हो, पानी की बोतल, गिलास या डिस्पोजेबल सामान। हमारे जीवन में प्लास्टिक का उपयोग एक सामान्य वस्तु की तरह हो रहा रहे है। जिससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है और यह हमारे लिए भी खतरनाक हैं। यही कारण है कि चीन के प्लास्टिक बैग के आयात को बैन करने के फैसले के बाद से ही विश्व में प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर रोक लगाने की चर्चा हो रही है।

आपकों बता दें, दुनियाभर में 7 तरह के प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाते हैं। सभी प्लास्टिक को अलग-अलग कोड दिए गए हैं, जिनसे इनकी पहचान होती है। वैसे तो सभी प्लास्टिक जहरीले और नुकसानदायक होते हैं। 1 से 7 तक के कोड वाले प्लास्टिक का जहरीलापन एक दूसरे से काफी अलग होता है।

हमारे लिए बेहतर होगा कि प्लास्टिक से बनी चीजों का कम से कम इस्तेमाल करें लेकिन अगर इन्हें इस्तेमाल करना मजबूरी है, तो ऐसे प्लास्टिक का उपयोग करें जो थोड़ा कम जहरीला हो। आम तौर पर 2, 4 और 5 कोड वाले प्लास्टिक 1, 3, 6 और 7 कोड वाले प्लास्टिक से बेहतर होते हैं।

कोड 1 प्लास्टिक- कोड 1 प्लास्टिक में पॉलीएथिलीन टेराफ्थलेट मौजूद होता है। पॉलिएस्टर का कपड़ा, बोतल, जूस, माउथवॉश, जैम, पानी आदि चीजों की बोतल इसी प्लास्टिक की मदद से बनाई जाती हैं। इस प्लास्टिक से होने वाला नुकसान:- पॉलीएथिलीन टेराफ्थलेट में लीच एंटीमोनी ट्राइऑक्साइड और phthalates शामिल होते हैं। ये दोनों ही सेहत के लिए काफी खतरनाक होते हैं। एंटीमोनी ट्राइऑक्साइड से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है। इसके अलावा इससे त्वचा संबंधी समस्या, पीरियड्स और प्रेग्नेंसी में भी दिक्कत हो सकती है।

कोड 2 प्लास्टिक- कोड 2 प्लास्टिक में हाई डेंसिटी पॉलिथीन पाई जाती है। दूध, जूस, शैंपू, डिटर्जेंट और कुछ दवाइयों की बोतल कोड 2 प्लास्टिक की बनी होती हैं। हालांकि इस प्लास्टिक का कम प्रयोग करने से ज्यादा नुकसान नहीं होता है।

कोड 3 प्लास्टिक- इस प्लास्टिक में पॉलीविनाइल क्लोराइड मौजूद होता है। पॉलीविनाइल क्लोराइड बच्चों के खिलौने, माउथवॉश की बोतल, कार्पेट के निचले हिस्से, खिड़कियों के फ्रेम, शैंपू की बोतल आदि चीजों में इस्तेमाल किया जाता है। अगर आप इस प्लास्टिक का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाएं. क्योंकि ये प्लास्टिक सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। इसमें बिस्फेनॉल  लैड, मर्करी, डाइऑक्सीन, कैडमियम मौजूद होते है,इससे अस्थमा होता है और बच्चों को एलर्जी भी होती है साथ ही यह वातावरण पर भी बुरा असर डालते है। इससे कैंसर होने की संभावना भी सबसे ज्यादा रहती है जिसमें मुख्य रूप से ब्रेस्ट कैंसर होता है।

कोड 4 प्लास्टिक- इस कोड के प्लास्टिक में लो डेंसिटी पॉलिथीन पाया जाता है। पॉली बैग, ब्रेड, फ्रोजन फूड, गार्बेज, तार का केबल, खाना रखने के डब्बे आदि बनाए जाते हैं. ये प्लास्टिक दूसरे प्लास्टिक के मुकाबले कम नुकसान पहुंचाता है।

कोड 5 प्लास्टिक- इसमें पोलीप्रोपलीन मौजूद होते हैं। यह प्लास्टिक बच्चों के डायपर, सैनिटरी नैपकिन, बच्चों की बोतल, स्ट्रॉ, चीज, दही, कैचअप की बोतल के ढक्कन इसी प्लास्टिक से बनाए जाते हैं। यह प्लास्टिक वैसे तो ज्यादा खतरनाक नहीं होता है लेकिन इससे अस्थमा हो सकता है।

कोड 6 प्लास्टिक- इस प्लास्टिक में पॉलीस्टीरीन पाया जाता है। इस प्लास्टिक का सबसे ज्यादा असर नर्वस सिस्टम और दिमाग पर पड़ता है। जानवरों पर हुई कई स्टडी में सामने आ चुका है कि कोड 6 वाले प्लास्टिक से फेफड़े, लिवर, और इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुंचता है।

कोड 7 प्लास्टिक- कोड 7 प्लास्टिक में पॉलीकार्बोनेट मौजूद होता है। पानी की बोतल, पानी के बड़े कंटेनर , बच्चों की बोतल, कप, बेकिंग बैग, कैचअप और जूस के कंटेनर, चश्मे के लेंस, सीडी, डीवीडी आदि चीजों में इस प्लास्टिक शामिल होता है। इस प्लास्टिक के इस्तेमाल से शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन डिस्टर्ब हो जाता है जिससे पुरुषों के स्पर्म प्रोडक्शन में कमी आ सकती है. इसके अलावा इम्युनिटी पावर कमजोर होती है. डायबिटीज, इन्फर्टीलिटी, मोटापा, ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, दिल से संबंधित बीमारी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

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