कोटा नगर निगम के तुगलकी फरमान के बाद शुरू हुआ हंगामा

FirstIndia Correspondent Published Date 2017/11/22 06:32

कोटा| कोटा नगर निगम का पहला वह मुख्य काम शहर को साफ रखना है, लेकिन कोटा निगम इस काम के लिए भी कोचिंग स्टूडेंट पर आर्थिक बोझ डालने की तैयारी कर चुका है| निगम सफाई के लिए हर साल 65 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर भी रहा है, लेकिन अचानक उसकी राजस्व समिति सफाई करने के बदले कोचिंग संस्थानों से 1000 हजार रूप्ए प्रति स्टूडेंट पर 1 साल के लिए टैक्स लगाने का प्रस्ताव लाई है। अब इसका विरोध जमकर हो रहा है, इस फरमान का स्टूडेंट्स सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे है। 
 
हाथ में तख्ती और कटोरा लिए बाजारों में घूम रहे यह वह स्टूडेंट्स है, जो शिक्षा नगरी के रोजगार को बढ़ाते है और देश में शहर का नाम उचा रखते है, लेकिन अब यहीं स्टूडेंट्स निगम के एक प्रस्ताव के कारण आंदोलन करने को मजबूर है। निगम ने सफाई के नाम पर प्रति स्टूडेंट्स से 1 हजार रूपए सालाना लेने का प्रस्ताव बनाया है, जिसका हर तरफ विरोध हो रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत निगम को केंद्र सरकार की तरफ से फंडिंग हो रही है| यही नहीं निगम के पास इसके अलावा भी ऐसे कई माध्यम हैं जिनसे करोड़ों रुपए की आय हो सकती है, लेकिन निगम के इस तुगलकी फरमान का जमकर विरोध हो रहा है आज कोचिंग संस्थानों के स्टूडेंट्स सड़कों पर उतरे और उन्होंने इस फरमान का जमकर विरोध किया| छात्र-छात्राओं ने हाथों में तख्तियां लेकर बाजार में चंदा एकत्र किया और निगम के इस फैसले का विरोध किया। 

कोटा के कोचिंग स्टूडेंट सफाई शुल्क लगने से पहले ही करीब 200 करोड़ रुपए बतौर सर्विस टैक्स और जीएसटी के रूप में सरकार को दे चुके है| 1 जुलाई से पहले फीस भरने वालों ने 15 प्रतिशत सर्विस टैक्स दिया था और 1 जुलाई के बाद 18 प्रतिशत राशि जीएसटी के रूप में देनी पड़ी। नगर निगम के नए प्रस्ताव के विरोध में स्टूडेंट ही नहीं उनके अभिभावक भी हैरान और परेशान है कि अब उन्हें और कितना टैक्स देना पड़ेगा। अभिभावकों का यह भी कहना है कि कोटा में नगर निगम की तरफ से स्टूडेंट्स को कोई सुविधा तो मिलती नहीं लेकिन अब सफाई के नाम पर स्टूडेंट पर यह बोझ क्यों डाला जा रहा है। 

उधर नगर निगम के इस फरमान के विरोध में विपक्ष भी आ खड़ा हुआ है| विपक्ष ने भी स्टूडेंट के साथ मिलकर कोचिंग क्षेत्र में नगर निगम के इस फैसले का विरोध किया और आगामी बोर्ड की बैठक में इस फैसले को लागू नहीं किए जाने पर दबाव बनाने की बात कहीं है। नगर निगम के इस फैसले से कोटा में देशभर से पढाई करने आने वाले एक लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। निगम ने यह फैसला अपने राजस्व को बढ़ाने के लिये ले लिया है, लेकिन अब कहीं ना कहीं आमजन से लेकर कोचिंग संस्थानों और अभिभावकों से लेकर कोचिंग स्टूडेंट तक हो रहे इस विरोध पर निगम ने चुप्पी साध ली है| अब देखना यह कि निगम अपने इस फैसले पर कामय रहता है या अपने फैसले को बदलता है। 

 


 

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