हाथी पर सवार 45 फीट ऊंचे रावण का होगा दहन

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/10/19 12:57

परबतसर(नागौर)। ओझा के पिता दुर्गालाल ओझा ने वर्ष 1963 में मकराना में दशहरा पर्व पर दहन के लिए रावण के पुतले का निर्माण किया था। उसके बाद मनुज गुरु ने भी परबतसर समेत कई शहरों के लिए रावण के पुतले बनाए। गत सालों से उनके पुत्र प्रशांत ओझा, सागर ओझा भी रावण के पुतलों का निर्माण कर रहे हैं। इस साल दशहरा पर्व पर दहन के लिए वे परबतसर, डेगाना, बोरावड़, नावां शहरों के लिए रावण के पुतलों का निर्माण किया जा रहा है। 

मनुज गुरु उर्फ राजनारायण ओझा ने बताया कि उनके पिता दुर्गालाल ओझा ने वर्ष 1963 में मकराना चारभुजा सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित दशहरा पर्व के लिए 36 फीट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण 35 रुपए में किया था। इसके बाद वे लगातार रावण के पुतले का निर्माण करते रहे एवं पुतले का आकार भी हर साल बदलते रहे। 

एक बार रथ पर सवार रावण के पुतले का निर्माण किया। 1970 में मनुज गुरु भी उनके पिता के साथ इस काम में जुट गए एवं रावण को हाथी पर बैठाकर पुतला निर्माण किया। 

इस आकार को लोगों ने काफी पसंद किया। 1992 में मनुज गुरु के पुत्र भी इस काम में सहयोग करने लगे। बाद में मकराना के पुतले का निर्माण का काम तो स्थानीय संस्था द्वारा किया जाने लगा। परंतु इस परिवार को परबतसर, डेगाना, बोरावड़, नावां आदि कई शहरों से भी ऑर्डर मिलने लगे। परंतु इस काम को दशहरा पर्व पर निर्धारित समय सीमा में करना होता है इस कारण क्षमता से अधिक ऑर्डर नहीं लेते है। 

इसके अलावा पुतला निर्माण का नगरपालिका व संस्था का बजट भी कम होता है इस कारण ज्यादा मजदूर भी नहीं रख सकते हैं। वे इस साल डेगाना के लिए 51 फीट, बोरावड़ के लिए 41 परबतसर, डेगाना, नावां, बोरावड़ शहरों में दशहरा पर्व पर दहन के लिए मनुज गुरु के निर्देशन में मनोहर बाबा की बगीची में प्रशांत, सागर ओझा व कलाकारों द्वारा रावण पुतला निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। 

16 अक्टूबर की शाम से जैसे-जैसे निर्माण पूरा होगा, इनको वाहनों में रखवाकर संबंधित शहरों के लिए रवाना कर दिया जाएगा। मनुज गुरु ने बताया कि रावण के पुतले निर्माण करना उनके परिवार की मुख्य आजीविका का साधन नहीं है। रावण के पुतले निर्माण करना उनके परिवार की रुचि व आस्था, परंपरा निभाने से जुड़े हुए रहना है। फीट और नावां के लिए 45 फीट ऊंचे रावण के पुतले निर्माण कर रहे हैं। परबतसर के रावण के पुतले की अलग ही खासियत हैयह रावण का पुतला हाथी पर सवार होगा।
 

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