रिजर्व बैंक ने रद्द किया 4230 NBFC का पंजीयन, राज्य की 37 कम्पनियों पर भी गिरी गाज

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/10/24 09:15

जयपुर (विमल कोठारी)। गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों के माध्यम से होने वाले फर्जीवाड़े पर चोट मारने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने फिर हथौड़ा हाथ में लिया है। इस माह की शुरुआत में RBI ने देश में कथित रूप से गैर बैंकिंग सेवाएं दे रही जोरदार चोट मारते हुए उनकी मान्यता ही समाप्त कर दी है। जिन NBFC कम्पनियों  की मान्यता समाप्त की है, उनमें से अनेक तो प्रतिष्ठित घरानों से जुड़ी है। RBI अब तक 4230 NBFC कम्पनियों की मान्यता समाप्त कर चुका है। 

वैकल्पिक रूप से देश में बैंकिंग गतिविधियां संचालित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक नॉन बैंकिंग फाइनेंस कम्पनियों को कार्य करने की अनुमति देता है। सामान्यत: NBFC के रूप में पंजीकृत ये कम्पनियों देश भर में जरूरतमंदों को ऋण जारी करने अथवा एक सीमा में  धन का संग्रहण करती है। लेकिन ये कम्पनियां बैंकों की तरह खाते नहीं खोल सकती। चूंकि इन कम्पनियों को RBI से अनुमति प्राप्त होती है, अत: ऋण लेने वाले व जमाकर्ताओं में इनके प्रति विश्वास होता है, अत: इन कम्पनियों के कर्ताधर्ताओं को थोड़ा अधिक ब्याज देने पर न केवल जमाएं मिल जाती है, बल्कि ये थोड़ा जोखिम उठाकर ऋण भी जारी कर देते हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि NBFC की मान्यता समाप्त करने से बैंकों को लाभ होगा। NBFC से सेवाएं ले रहे ग्राहक अब बैंकों की ओर रुख करेंगे, जिससे इनका कारोबार बढ़ेगा। इसके लिए बैंक अलग से फण्ड भी बना रहे हैं। हालांकि यह अलग बात है कि ग्राहकों को अब बैंकों की दस्तावेजी पैचिदगियों व लम्बी प्रकिया का सामना करना होगा। 

पिछले माह इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग व फाइनेंशियल सर्विसेज अर्थात IL&FS का घोटाला उजागर होने के बाद RBI ने ऐसी कम्पनियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया, जिनकी सम्पत्तियों व दायित्वों में भारी अंतर था। इसी का असर यह हुआ कि RBI ने एक झटके में ही 4230 NBFC की मान्यता को ही समाप्त करने का फैसला किया। बताया जाता है कि RBI ने जिन कम्पनियों की मान्यता को समाप्त किया है, उनमें से अनेक ऐसी कम्पनियां है, जो देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों से भी जुड़ी है। 

मान्यता रद्द होने वाली NBFC कम्पनियों की सूची का विश्लेषण किया जाएं तो इसमें सबसे अधिक गाज पश्चिम बंगाल में पंजीकृत NBFC पर पड़ी है। सूची के अनुसार अकेले पश्चिम बंगाल में पंजीकृत 1095 NBFC कम्पनियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज के राजस्थान कार्यालय की 37 कम्पनियों की मान्यता भी रिजर्व बैंक ने समाप्त कर दी। राज्य में जिन कम्पनियों की मान्यता समाप्त हुई, उनमें राजस्थान स्टेट इण्डस्ट्रीयल डवलपमेंट एण्ड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड अर्थात रीको, हाल ही बैंकिंग का लाइसेंस प्राप्त करने वाले AU स्माल फाइनेंस बैंक की AU फाइनेंसर्स इण्डिया लिमिटेड, ऑटोपाल समूह की पॉल सॉफ्ट इन्फोसिस्टम लिमिटेड, मेंटोर इण्डिया लिमिटेड जैसी कम्पनियां भी शामिल है। हालांकि रीको अधिकारियों का कहना है कि NBFC गतिविधियां रीको के कार्य का एक छोटा सा हिस्सा ही था, अब रीको केवल लेंडर के रूप में कार्य करेगा। उधर AU फाइनेंसर्स इण्डिया के अधिकारियों का कहना है कि AU स्माल फाइनेंस बैंक के रूप में कम्पनी को मान्यता मिलने के कारण NBFC की मान्यता समाप्त हुई है। चूंकि पूर्व में ऐसी सूची नहीं थी, अत: RBI ने एक साथ सभी की सूची जारी की है। 

NBFC पर लगाम के लिए RBI की इस पहल को केन्द्र सरकार की ओर से कॉरपोरेट सैक्टर में किए जा रहे सफाई अभियान का हिस्सा माना जा सकता है। विशेषज्ञों की माने तो देश में 35 हजार से अधिक NBFC रिजर्व बैंक से पंजीकृत है। इस आधार पर 4230 की सूची को बड़ा नहीं माना जा सकता। ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि यह सफाई अभियान जारी रहेगा और वित्तीय गड़बड़िया करने वाली NBFC  कम्पनियों की नकेल और कसी जाएगी। 

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