धरियावद में गंदगी एवं प्रदूषण से अस्तित्व खोती पवित्र कर्मोचनी नदी

Published Date 2018/06/12 09:57, Written by- FirstIndia Correspondent

धरियावद (प्रतापगढ़)। केंद्र सरकार द्वारा प्रदेशभर में स्वच्छता अभियान को लेकर प्रशासन जागरूकता फैला रहा है। वहीं दूसरी और धरियावद में सरकार के स्वछता मिशन की जम कर धज्जियां उड़ाई जा रही है।
आज हम आप जो तस्वीर दिखाने जा रहे है वह धरियावद-प्रतापगढ के मार्ग को जोड़ने वाली कर्मोचनी नदी की,जो धरियावद में आने और बाहर जाने का एक मात्र मुख्यमार्ग है। इस मार्ग पर होते हुए दिन में कई प्रशासनिक अधिकारी भी गुजरते है। 
विगत कई सालों से नदी के किनारे पर कचरे के ढेर लगे है जिससे आस-पास के क्षेत्र में भीषण दुर्गन्ध फैली है और गंभीर बीमारियों के होने का खतरा भी मंडरा रहा है। सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि सीतामाता वन्यजीव अभ्यारण से बहकर आने वाली कर्मोचनी नदी, जिसे मान्यता के अनुसार पवित्र माना जाता है। वह अब गंदे नाले के रूप में अपना स्वरूप बना चुकी है,नगर में नालियों से बहकर आने वाला गंदा पानी सीधे नदी में मिल कर आस्था को आघात पहुंचा रहा है। नदी का पानी आज भी लोग नहाने और पेयजल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे लोगों में गंभीर बीमारियां एवं चर्म रोगों के लक्षण भी पाए गए। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन को इस बात से अवगत करवाया हैं। दर्जनों ज्ञापन जिला कलेक्टर,उपखण्ड अधिकारी,राजनेता ओर जन प्रतिनिधियों के नाम भी प्रेषित किए, लेकिन समस्या जस के तस बनी है।
मीडिया द्वारा नदी की बदहाल स्थिति को जब उपखण्ड अधिकारी को बताया गया तो उपखण्ड अधिकारी ने नदियों के प्रदूषण पर चिन्ता जाहिर करते हुए स्थानीय ग्राम पंचायत एव ग्राम सेवक को नोटिस जारी करने की बात कहते हुए जल्द कर्मोचनी नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने का आश्वासन दिया है।

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in


loading...

-------Advertisement--------



-------Advertisement--------