अकाल मृत्यु से बचने और यमराज को प्रसन्न करने के लिए इस मुहूर्त पर जलाए रूप चौदस को दीये

Published Date 2017/10/16 03:55,Updated 2017/10/18 10:07, Written by- FirstIndia Correspondent

इस बार रूप चौदस 18 अक्टूबर को मनाई जाएगी जिसे छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। यह पांच पर्वों की श्रृंखला के मध्य में रहने वाला त्यौहार है। इस दिन दीपोत्सव के स्वागत के लिए घर, आंगन और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सजाया-संवारा जाएगा। इसके साथ ही आम्रपाल, पुष्पों की बंधनवार बांधकर, रंग-बिरंगी लाइटों से घर प्रतिष्ठानों को रोशन किया जाएगा। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। यमराज को प्रसन्न करने के लिए शाम को दीपदान किया जाएगा। महिलाएं शाम को घर-घर जाकर दीपदान करेंगी।

नरक चतुदर्शी के दिन संध्या के समय 14 दीपों का दान किया जाता है। इन्हें या तो किसी नदी या तालाब में प्रवाहित किया जाता है या घर के बाहर लगाया जाता है। चतुर्दशी के दिन प्रातः चार बत्ती वाला दिया किसी चौराहे पर रखें। इससे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। दुर्घटनाओं और रोग आने का अंदेशा समाप्त हो जाता है। दीये के तेल में कुछ दाने तिल्ली के भी डालें। नरक चतुर्दशी को रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व तिल के तेल से शरीर की मालिश करने का विधान है। इस दिन बेसन, हल्दी, चंदन का उबटन लगाया जाता है, फिर स्नान किया जाता है।

इसके पीछे तर्क यह है कि यह मौसम बारिश की विदाई और सर्दी की शुरुआत के बीच का होता है। इस समय कई तरह की बीमारियां पनपती हैं। तिल के तेल की मालिश से शरीर पर कीटाणुओं, बैक्टीरिया का असर नहीं होता और शरीर में रक्त का संचार व्यवस्थित होता है। बेसन, चंदन, हल्दी शरीर को आरोग्य प्रदान करती है और सौंदर्य में वृद्धि करती है। पद्म पुराण के अनुसार जो व्यक्ति नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय के पूर्व स्नान करता है वह यमलोक नहीं जाता।

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