गंगा एक्ट को लेकर अनशनरत स्वामी सानंद का निधन, संत समाज में रोष

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/10/11 10:01

ऋषिकेश। गंगा की अविरलता निर्मलता और स्वच्छता के लिए आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के ऋषिकेश एम्स अस्पताल में हुए आकस्मिक निधन पर संत समाज ने गहरा रोष व्यक्त किया है। हरिद्वार में साधु संत के साथ-साथ स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हत्या का शक जताते हुए स्वामी सानंद के शरीर का पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। साधु संतों ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की भी मांग की है। 

स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के आकस्मिक निधन होने पर स्वामी सानंद के आध्यात्मिक गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि हमें पूरी तरह से यह लगता है कि स्वामी सानंद जी की हत्या हुई है। उनका यह भी कहना है कि सरकार यदि यह सन्देश देना चाहती है कि जो गंगा की बात करेगा उसकी हत्या हो जाएगी तो हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि इस देश में गंगा के लिए पहले भी हमारे पूर्वजों ने बलिदान किया है और आज भी गंगा भक्त गंगा के लिए कुछ भी कर गुजरने से पीछे नहीं हटते। स्वामी ने कहा कि सानन्द जी के चले जाने से गंगा अभियानम् नहीं रुकेगा यह निरन्तर चलता रहेगा 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तीन मुख्य मांगे

1. स्वामी सानन्द जी के शरीर का पोस्टमार्टम हो ।क्योंकि हमें शंका है कि उनकी हत्या हुई है ।

2. स्वामी सानन्द जी का शरीरं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय को सौपा जाए क्योंकि उन्होंने हमसे यह कहा था कि मेरे चले जाने के बाद मेरे शरीर को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मेडिकल के विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए दिया जाए 

3. उनकी मृत्यु की परिस्थितियों की जांच के लिये सीबीआई को नियुक्त किया जाये।

वहीं हरिद्वार में भी स्वामी सानंद की आकस्मिक मृत्यु से संत समाज काफी दुखी है। भारत साधु समाज के उपाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी का कहना है कि यह जांच का विषय है। इसमें संत समाज उच्च स्तरीय जांच की मांग करता है। कल स्वामी सानंद का स्वास्थ्य ठीक था फिर अचानक क्या हुआ इसकी पूर्ण जांच होनी चाहिए संत समाज मे इस घटना से रोष है केंद्र सरकार द्वारा स्वामी सानंद की अनदेखी की गई सरकार की मंशा में खोट है स्वामी सानंद के जाने से यह अनशन समाप्त नही होने वाला है। 

इस मामले में सतपाल ब्रह्मचारी का कहना है कि संत समाज इस घटना से आहत है। गंगा के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले संत को आज हमने खो दिया है। सरकार को समय लेते संज्ञान लेना चाहिए था। वह देश हित में कार्य कर रहे थे। पहले ही सरकार सचेत होती तो यह घटना नही होती। स्वामी सानंद की जायज मांगे थी जो सरकार द्वारा मान लेनी चाहिए थी। 

स्वामी सानंद की मृत्यु से जहां पूरे संत समाज में रोष है तो वहीं इस मामले में संत समाज जांच की मांग कर रहे है। एक बार फिर आज मां गंगा की स्वच्छता निर्मलता और अविरलता का प्रण लेने वाले गंगा पुत्र को हमने खो दिया है, यह हमारे लिए अपूर्ण क्षति है।

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