यहां महज 15 मिनट में हो सकेगी टीबी के रोगी की पहचान

Published Date 2018/06/23 06:27, Written by- FirstIndia Correspondent

बारां। कभी टीबी रोग के लिए सुर्खियों में रहने वाला बारां जिला अब टीबी रोग भागने के लिए भी देशभर में नंबर वन बनने जा रहा है। जिला अस्पताल के ड़िजिटल एक्सरे मशीन में कम्यूटर में एक क्यूएक्सआर (QXR) आर्टिफिशयल इंटेलीजेंसी नाम का एक साॅफ्टवेयर इंस्टाल किया गया है, जिससे जरिये टीबी रोगियों की पहचान केवल 15 मिनट में हो सकेगी। इससे आने वाले समय में तुरंत टीबी रोगी की पहचान करके इलाज शुरू किया जा सकेगा और टीबी मुक्त भारत मिशन 2025 सफल हो सकेगा।

इसकी शुरूआत बारां जिले में आज से शुरू हो गया है। कल कम्पनी के प्रतिनिधि अंकित मोदी, अमित खरे, अरूण कांत शर्मा ने टेस्टिंग के तौर पर काम देखा और अस्पताल में कार्यरत अधिकारियों को इसके बारे में जानकारी दी। इनमें सीएमएचओ डा. सम्पतराज नागर, पीएमओ एस के मालव जिला क्षय अधिकारी डॉ. केके गुप्ता मौके पर मौजूद रहे।

कम्पनी क्यूयूआर ई डाॅट इन के प्रतिनिधि ने जिला अस्पताल में क्यूएक्सआर (qxr) टीबी रोग के लिए आर्टिफिशयली इंटेलीजेंसी (IA) के साॅफ्टवेयर अपलोड़ किया। इस साॅफ्टवेयर के जरिये अन्य बीमारियां भी पकड़ में आ सकेगी, जिनमें फाइट्रोसेस, केल्सीफिकेशन, आदि बीमारियों की पहचान हो सकेगी और बीमारी पहचान में आने के बाद तुरंत उपचार हो सकेगा।

पहले क्या होता था :
मरीज का चेस्ट एक्सरे कराने के भी बाद टीबी की बीमारी पकड़ने में नहीं आती थी और मरीज को यह पता नहीं चल पाता था कि मेरे टीबी या क्षय रोग है और टीबी का इलाज कराने में बहुत देर हो जाती थी। कई बार जिंदगी ही पूरी हो जाती थी और रोग का पता नहीं चल पाता था। दूसरा रोगी कारण यह है रोगी चेस्ट का एक्सरे तो करवा लेता था, लेकिन हर जगह रेड़ियोलाॅजिस्ट उपलब्ध नहीं होने पर जानकारी नहीं मिल पाती थी और रेड़ियोलाॅजिस्ट का मरीज को इंतजार करना पड़ता था। अब इस साॅफटवेयर के जरिये बगैर रेड़ियोजिस्ट के जरिये टीबी की पहचान हो सकेगी और मरीज का तुरंत उपचार शुरू हो सकेगा। बाद रेड़ियोलाॅजिस्ट से भी सलाह ले सकता है। यानि कुल मिलाकर बात यह है रोगी की पहचान होते ही इलाज शुरू हो सकेगा। 

देश में 27 लाख लोग टीबी से ग्रसित :
देश में वर्तमान में 27 लाख लोग टीबी से ग्रसित हैं और देश में हर रोज करीब 1000 मरीज सामने आ रहे हैं। अब सॉफ्टवेयर के जरिये तुरंत रोगी की पहचान हो सकेगी। जिले में वर्तमान में करीब 1500 रोगी टीबी है। इस तकनीक के माध्यम से टीबी मुक्त भारत की अभियान की सफल भूमिका होगी। नीति आयोग की ओर से बारां जिले को अतिमहत्वकांक्षी जिले में शामिल किया गया है। देशभर के जिलों में से बारां जिले का पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है। अगर जिले में यह प्रयोग सफल रहता है तो देशभर के सरकारी अस्पतालों में इसके साॅफ्टवेयर अपलोड़ किये जाएंगे।

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