तरावीह की नमाज : दुनियाभर में एक साथ होती है इबादत

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/05/31 05:15

जयपुर। इस्लाम के पवित्र माहे रमजान में इबादत का दौर जारी है। शुक्रवार को तीसरे जुम्मे की नमाज के साथ ही रमजान के 15 रोजे और 16 तरावीह की नमाज होगी। वही इसके बाद अब जुम्मातुल विदा की तैयारिया शुरू हो जायेगी। इस बीच मजिस्दो में तरावीह की नमाज जारी है। जयपुर शहर में लगभग 300 से अधिक मस्जिदो में तरावीह की नमाज होती है। जयपुर की जामा मस्जिद में विशेष तरावीह की नमाज होती है। कई मस्जिदो में तो यह नमाज 2 घण्टे की होती है। नमाज के दौरान कई जगह खास दुआ भी होती है।

आईए जानते है क्या है तरावीह की नमाज

नमाज ए तरावीह और तहज्जुद रात की नमाज असल में एक ही इबादत के दो नाम है। रात की नमाज अगर गैर-रमजान में सोकर उठने के बाद पढ़ी जाए तो तहज्ज़ुद कहलाती है और अगर रमजान में सोने से पहले ईशा के साथ पढ़ ली जाए तो इसको तरावीह कहते है। रमजान शरीफ में रोजे की वजह से कमजोरी और परेशानी सी हो जाती है और इफ्तार व खाने के बाद सोने और जब फिर आधी रात गए जाग कर तहज्ज़ुद के लिए लम्बा क़याम करना बहुत मुश्किल है।  इसलिए रसूलुल्लाह  ने रात की नमाज (तहज्ज़ुद) को रमजान शरीफ में ईशा के साथ पढ़ कर लोगो के लिए आसानी कर दी। ताकि वे तरावीह के बाद पूरी तरह आराम की नींद सो सके और फिर सुबह सादिक से कुछ पहले उठ कर सहरी खा कर रोजे के लिए तैयार हो जायें। 

तरावीह की नमाज से जुड़ा एक वाक्या

हजरत ज़ैद बिन साबित रजिउल्लाहो के नबी ने मस्जिदे नबवी में चटाई से घेर कर एक हुजरा बना लिया और रमजान की रातो में इसके अंदर नमाज पढ़ने लगे। धीरे धीजे और लोग भी जमा हो गए तो एक रात हजरत की आवाज नहीं आई, लोगो ने समझा के हजरत सो गए है। इस लिए इन में से बाज खंगारने लगे ताके आप बाहर तशरीफ़ लाएं। फिर हजरत  ने फ़र्माया के मैं तुम लोगों के काम से वाकिफ हुँ, मुझे डर है के कहीं तुम पर यह नमाज 'तरावीह' फर्ज न कर दी जाए और अगर फर्ज कर दी जाये तो तुम इसे कायम नहीं रख सकोगे। फिर कहा की, "ए लोगो ! अपने घरो में ये नमाज पढ़ो क्योंकि फर्ज नमाज के सिवा इंसान की सबसे अफजल नमाज है।" तहज्जुद वित्र के साथ रमजान में नमाज तरावीह बन गयी। याद रहे की तरावीह का असल नाम 'कयामे रमजान' है।

तरावीह की नमाज को लेकर कुछ खास बातें 

- तरावीह का वक्त ईशां की नमाज़ पढ़ने के बाद से शुरू होता है और सुबह सादिक़ तक रहता है। 
- वित्र की नमाज़ तरावीह से पहले भी पढ़ सकते और बाद में भी,लेकिन बाद में पढ़ना बेहतर है। 
- तरावीह की नमाज़ दो-दो रकअत करके पढ़नी चाहिए। 
- हर चार रकअत के बाद कुछ देर ठहर कर आराम कर लेना मुस्तहब है। 
- उस आराम लेने के दरम्यान अहिस्ता आहिस्ता क़ुरान जीद और तस्वीह पढ़ते रहे।  
- पूरे महीने में एक क़ुरान शरीफ तरावीह के अंदर पढ़ना सुन्नत है। 
- पूरे महिने में दो मर्तबा अफ़ज़ल है उस से ज्यादा हो तो क्या कहना।
- तीन दिन से कम में क़ुरान मजीद खत्म करना अच्छा नहीं है। 
- तरावीह पढ़ना और तरावीह में एक क़ुरान मजीद खत्म करना ये दोनों अलग अलग सुन्नते हैं। 
- तरावीह में नमाज पुरा होने के बाद भी नमाज पूरे माह अदा करना जरूरी है। 
 

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