पेडमेन की तरह झाड़ोल की आदिवासी महिलाएं बनेगी 'पेड वुमेन'

Published Date 2018/06/08 01:47, Written by- FirstIndia Correspondent

झाड़ोल। मासिक धर्म के दौरान उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक साधनों से महिलाओं को होने वाली बिमारियों के प्रति अक्षय कुमार द्वारा पेडमेन फिल्म के माध्यम से जागरूक करने के बाद, झाड़ोल क्षेत्र की एक स्वयंसेवी संस्था ने राजसमंद जिले में पेड बनवाने के साथ नि:शुल्क वितरण भी करवाए। यहीं संस्था अब आदिवासी बाहुल्य झाड़ोल क्षेत्र की महिलाओं को पेड निर्माण करने का प्रशिक्षण देने के साथ ही पेड का उपयोग करने के प्रति जागरूक भी कर रही हैं। राजसमंद में सफल निर्माण कार्य करने वाली महिलाओं द्वारा इनको वर्तमान में प्रशिक्षण दिया जा रहा हैं जिसके बाद यहीं पर पेड का निर्माण करने का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। इस नवाचार के चलते महिलाओं को बिमारीयों से तो बचाया ही जा रहा हैं साथ ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए आय का एक नया स्त्रोत भी पैदा हो जाएगा।

फलासिया पंचायत समिति मुख्यालय पर स्थित जे आर शर्मा कला महाविद्यालय परिसर में सृष्टि सेवा समिति, झाड़ोल व विज्ञान व प्रौद्योगिकी संस्थान जयपुर द्वारा तीन दिवसीय सेनेटरी पेड निर्माण प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया। प्रशिक्षण के दौरान क्षेत्र में संचालित स्वयं सहायता समूहों से जुडी हुई सत्तर महिलाओं ने भाग लिया। पूर्व में संस्था व डीएसटी जयपुर द्वारा राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ ब्लॉक के केलवाडा में संचालित सृष्टि सेनेटरी निर्माण स्वयं सहायता समूह की बीस महिलाओं को सेनेटरी पेड निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया था । फलासिया में प्रशिक्षण शिविर के दौरान कुंभलगढ़ में प्रशिक्षित दक्ष प्रशिक्षको ने अपनी सेवाएं देते हुए पेड निर्माण के बारे में बारीकी से जानकारी दी गई । 

प्रतिदिन बनते हैं चालीस पेकेट, चार सौ रूपए होता हैं मुनाफा
एक मार्च से कुंभलगढ़ में निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया व संस्था के सोहनलाल ने बताया कि आठ नेपकिन का एक पेकेट तैयार करने में बीस रूपए के लगभग लागत आती हैं । इस पेकेट को दस रूपए मुनाफा जोडकर तीस रूपए प्रति पेकेट की दर से बाजार में बेचा जा रहा हैं। इन महिलाओं द्वारा प्रतिदिन ऐसे चालीस पेकेट तैयार किए जा रहे हैं जिसके चलते हर रोज चार सौ रूपए का शुद्ध मुनाफा स्वयं सहायता समूह के खाते में बचत के रूप में आ जाता हैं । तीन महिनों की अवधि में इस समूह द्वारा लगभग पौने दो लाख रूपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया गया हैं । सेनेटरी नेपकिन निर्माण में उपयोग किए जाने वाला समस्त कच्चा माल उच्च गुणवत्ता का प्रयोग किया जा रहा हैं। महिलाओं द्वारा इसका उपयोग किए जाने से किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होने के साथ ही बिमारीयों से भी बचाव किया जा सकता हैं।

अस्सी प्रतिशत महिलाएं नहीं जानती पेड, एक हजार महिलाओं को करेंगे नि:शुल्क वितरण
संस्था द्वारा करवाए गए सर्वे के अनुसार आदिवासी बाहुल्य अतिपिछडे झाड़ोल तहसील क्षेत्र की अस्सी प्रतिशत से ज्यादा महिलाओं द्वारा सेनेटरी पेड का उपयोग करना तो दूर बल्कि उसके बारे में जानकारी तक नहीं हैं । गरीबी व अशिक्षा के चलते ये महिलाएं वर्तमान में भी मासिक धर्म के दौरान पारंपरिक रूप से प्रयोग किए जाने साधनों का ही ईस्तेमाल करती हैं । संस्था स्वयं सहायता समूह के माध्यम से पेड निर्माण करवाने के बाद एक हजार महिलाओं को नि:शुल्क वितरण करने के साथ ही उनके प्रयोग के प्रति जागरूक भी करेंगी ।
 

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