वसुंधरा कैबिनेट ने सर्क्यूलेशन के जरिये लिए ये अहम फैसले

Dr. Rituraj Sharma Published Date 2018/06/06 06:28

जयपुर (ऋतुराज शर्मा/ऐश्वर्य प्रधान)। सूबे की राजे कैबिनेट ने सर्क्यूलेशन के जरिये आज 3 बड़े फैसले किए हैं। इसके तहत अब आम जनता को स्टाम्प ड्यूटी पर गौवंश संरक्षण के लिए दोगुना सेस देना होगा। कैबिनेट आज्ञा के तहत सामूहिक विवाह और अनुदान नियम तय करते हुए पंजीयन और सर्टिफिकेट के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। साथ ही राजस्थान वैट अधिनियम में और संशोधन करते हुए सामानों या वस्तुओं पर कर का प्रावधान तय किया है। गौरतलब है कि लंबे समय से कैबिनेट की बैठक नहीं होने के चलते राज्य सरकार को सर्क्यूलेशन के जरिये अहम निर्णय करने पड़ रहे हैं।

क्या है सर्क्यूलेशन के जरिये लिए गए फैसलों में :
1. अब स्टाम्प ड्यूटी पर देना होगा दोगुना सेस
- कैबिनेट ने गौवंश संरक्षण पर 10 के बजाय अब 20% सेस लगाने का अनुमोदन किया।
- राजस्थान स्टाम्प संशोधन अध्यादेश 2018 को मंजूरी दी गई, जिसमें सेस दोगुना करने का प्रावधान है। 
- राजस्थान स्टाम्प अधिभार 1998 की अनुसूची में दस्तावेज तय किए गए हैं। उन दस्तावेजों की स्टाम्प ड्यूटी पर सेस का प्रावधान है, जिसे अब दोगुना कर दिया है। 

2. सामूहिक विवाह में पंजीयन और प्रमाण पत्र के लिए 15 दिन का समय
- सामूहिक विवाह करते समय लाभार्थियों ने अगर बैंक खाता नहीं दिया तो 15 दिन में देना होगा विवरण।
- सामूहिक विवाह एवं अनुदान नियम 2018 में संशोधन किया गया है।
- नियम 5 में संशोधन किया गया है।
- इसके तहत सामूहिक विवाह समारोह में विवाह होते ही 10 हजार रुपये मिलेंगे।
- 15 दिन में सर्टिफिकेट देने पर 5000 और मिलेंगे।
- राशि के लिए सत्यापन के रूप में पहले मूल निवास प्रमाण पत्र ही मान्य था। अब आधार कार्ड या भामाशाह कार्ड भी वैध। इन तीनों में से कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर मिलेगा लाभ। 
- सर्टिफिकेट के लिए पहले ब्लॉक विकास अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी सक्षम अधिकारी के रूप में नामित हो सकेंगे।
- अखबार में सामूहिक विवाह विज्ञप्ति प्रकाशित होने के आधार पर संबंधित ब्लॉक अधिकारी या बाल विकास अधिकारी से रिपोर्ट लेकर शास्ति का प्रस्ताव नोडल अधिकारी कलेक्टर को प्रस्तुत कर सकेगा।
- विशेष हालात में नियमों में छूट जरूरी हो तो सहायक निदेशक की रिपोर्ट पर सक्षम स्तर से प्रशासनिक अधिकारी के अनुमोदन के बाद निदेशालय छूट दे सकता है। 
- तीस दिन के बाद प्रस्ताव पर विचार नहीं होगा। 
- यह भी प्रावधान है कि उसी लाभार्थी को इस योजना में लाभ दिया जाएगा, जिसे समान योजना में लाभ देय नहीं हो। 
- संशोधन जरूरी हो तो करवाना होगा प्रशासनिक अनुमोदन। 

3. माल व विक्रय कर पर अधिभार
- राजस्थान मूल्य-परिवर्द्धित कर अधिनियम 2003 के तहत अधिसूचित सामानों या सामग्री के क्रय-विक्रय पर सेस लगेगा। 
- इसके लिए राजस्थान मूल्य वर्द्धित कर संशोधन अध्यादेश 2018 का प्रारूप कैबिनेट ने अनुमोदित किया है। 
- सेस के प्रावधान के लिए इस अध्यादेश का नया प्रारूप तैयार किया गया है। 

इनमें से राजस्थान मूल्य वर्द्धित कर संशोधन अध्यादेश 2018 के तहत लगाए सेस और स्टाम्प ड्यूटी पर 10 के बजाय 20 फीसदी सेस करने के संशोधन को विधानसभा में पुर्नस्थापन करना पड़ेगा। विधानसभा के अगले सत्र में इन दोनों अध्यादेशों को पुर्नस्थापित करने का कैबिनेट ने अनुमोदन कर दिया है।

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