विजय हजारे ट्रॉफी: चयनकर्ताओं की मनमर्जी के चलते मिली लगातार पांच हार 

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/09/29 10:58

जयपुर। टीम राजस्थान के चयनकर्ताओं की कारगुजारियां अब टीम के शर्मनाक प्रदर्शन से सामने आने लगी है। बीसीसीआई के घरेलू सत्र के पहले ही टूर्नामेंट यानी विजय हजारे ट्रॉफी में राजस्थान टीम को लगातार पांच हार का सामना करना पड़ा है। इन चयनकर्ताओं को हाईकोर्ट ने नियुक्त किया था, लेकिन चयनकर्ताओं ने इसका बेजा फायदा उठाते हुए मनमर्जी से चयन किया, लेकिन मैदान पर उनकी कारगुजारियां सामने आ ही गई। 

राजस्थान क्रिकेट संघ में चल रहे विवाद का फायदा उठाकर चयनकर्ता बनने वालों पर सवाल पहले से ही उठ रहे थे, लेकिन अब टीम के परिणाम ने यह साबित कर दिया है कि चयनकर्ताओं के फैसले गलत थे और उन्होंने चहेते खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया। मैदान पर इन खिलाड़ियों का दम निकल गया और हालत यह है कि बीसीसीआई के पहले ही घरेलू टूर्नामेंट में राजस्थान को लगातार पांच मैचों में हार झेलनी पड़ी। 

सबसे पहले पांचों मैचो के परिणामों पर एक नजर

- झारखंड ने 7 विकेट से हराया
- तमिलनाडु ने एक विकेट से मात दी
- गुजरात ने 8 विकेट से रौंदा
- हरियाणा ने 147 रनों से मैदान चटाया
- त्रिपुरा ने 48 रन से शिकस्त दी

बीसीसीआई के कॉर्डिनेटर केवीपी राव ने दिखावे के नाम पर चयन ट्रायल आयोजित कराई थी। पूरे राजस्थान से सैकड़ों खिलाड़ी ट्रायल देने आए। लाखों रुपए भी खर्च किए गए, लेकिन परिणाम वहीं ढाक के तीन पात। सब कुछ दिखावा। खिलाड़ी व टीम पहले से तय थी। उनका ही चयन हुआ, जिनका अब तक होता आया है। ट्रायल के माध्यम से एक भी नया खिलाड़ी टीम में नहीं आ सका। यानी पूरी ट्रायल का कोई मतलब नहीं था। ट्रायल से पहले लोगों ने बता दिया था कि अशोक मेनारिया कप्तान बनेंगे, क्योंकि पटकथा चयनकर्ता लिख चुके थे। हुआ भी वही उदयपुर के अशोक मेनारिया कप्तान बना दिए गए। टीम में चार खिलाड़ी ऐसे लिए गए, जो राजस्थान के मूल के है ही नहीं। लेकिन कहते हैं कि सिफारिश कितनी भी बड़ी हो, प्रदर्शन तो मैदान में पता चल जाता है। हुआ भी वहीं। टीम को लगातार पांच मैचों में हार झेलनी पड़ी।

टीम के बल्लेबाजों व गेंदबाजों का प्रदर्शन

- कप्तान अशोक मेनारिया सुपर फ्लॉप
- 5 मैचों में सिर्फ 30 रन बना सके मेनारिया
- भूमिका ऑल राउंडर की, विकेट एक भी नहीं
- बिष्ट बंधु रॉबिन व चेतन रहे फिसड्डी
- दिल्ली के दोनों भाईयों ने कुल 108 रन बनाए
- आदित्य गढ़वाल ने 3 मैचों में 34 रन बनाए
- महिपाल लोमरोर ने 4 मैच में 34 रन बनाए
- अमित गौतम 4 मैचों में 30 रन बना सके
- गेंदबाज अभिमन्यु लांबा को 5 मैच में 3 विकेट
- तेजेंदर सिंह को 5 मैचों में 2 विकेट

जिन खिलाड़ियों के नाम पर चयनकर्ताओं ने दंभ भरा था, वे मैदान पर फिसड्डी साबित हुए। एक दो मैच किसी खिलाड़ी के खराब हो सकते हैं, लेकिन यहां तो पांच के पांच मैच हार गए और एक बार भी संघर्ष करते नहीं दिखे। टीम के दो खिलाड़ी अर्धशतक लगा सके। सब तरफ किरकिरी होकर देख चयनकर्ताओं ने अब टीम में तुरत फुरत चार बदलाव कर दिए हैं। कप्तान अशोक मेनारिया को टीम से ही बाहर कर दिया है। अंकित लांबा, आदित्य गढवाल व रॉबिन बिष्ट को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया, लेकिन कहा जा रहा है कि अब पछताय होत क्या  जब चिड़िया चुग गई खेत। सवाल यह है कि हार की जिम्मेदारी सिर्फ खिलाड़ियों की तय होगी या फिर चयनकर्ताओं व कोच की भी। क्या इनको अपने पद नहीं छोड़ देने चाहिए। लेकिन ऐसा होगा नहीं, क्योंकि कोर्ट ने इनको नियुक्त किया है और ये अपनी मनमर्जी जारी रखेंगे।

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