कंपनी ने माना, EVM में था रिमोट कंट्रोल सॉफ्टवेयर

Published Date 2018/07/18 05:08, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। क्या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) हैक प्रूफ है?, क्या इसे कभी हैक नहीं किया जा सकता?... इस पर एक बार फिर से बहस छिड़ सकती है। दरअसल, अमेरिकी वोटिंग मशीन बनाने वाली एक कंपनी ने दावा किया है कि उनके द्वारा बेची गई कुछ मशीनों में रिमोट कंट्रोल टूल इंस्लॉट किए गए थे। ऐसे में यह तो साफ है कि ईवीएम को आसानी से हैक किया जा सकता है। हालांकि, कंपनी इस बात की पुष्टि नहीं करती है कि उसके द्वारा बेची गई मशीनें भारत में उपयोग ली गई। 


बता दें कि भारत में लगातार ईवीएम हैकिंग पर सवाल उठते रहे है। जब भी कोई पार्टी हार जाती है तो विजेता पार्टी पर ईवीएम हैक का आरोप लगा देती है। चुनाव आयोग कई बार सफाई दे चुका है कि ईवीएम हैक की खबरें महज आरोप होते है, वास्तविकता में ईवीएम हैक प्रूफ है और इसे कभी भी हैक नहीं किया जा सकता है। लेकिन, अमेरिकी कंपनी के खुलासे के बाद चुनाव आयोग के दावों पर सवाल खड़े होते नजर आ रहे है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका की टॉप वोटिंग मशीन निर्माता कंपनी इलेक्शन सिस्टम एंड सॉफ्टवेयर ने माना है कि उसके द्वारा बेची गईं कुछ वोटिंग मशीनों में रिमोट टूल इंस्टॉल किए गए थे। अमेरिकी सेनेटर रॉन वाइडेन को भेजे गए एक लेटर में कंपनी ने कहा है कि साल 2000-2006 में कुछ हैंडफुल मशीनें बेची गई थीं यानी 6 साल तक वोटिंग मशीन में रिमोट ऐक्सेस सॉफ्टवेयर था। अब वोटिंग मशीन पर सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 

कंपनी के मुताबिक साल 2000-2006 के बीच कई कस्टमर्स को ऐसे pcAnywhere नाम के रिमोट कनेक्शन सॉफ्टवेयर दिए गए। 2006 में करीब 60 फीसदी बैलेट कास्ट कंपनी के सिस्टम्स से किए गए थे। यह सॉफ्टवेयर वोटिंग मशीन में नहीं था, बल्कि इलेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम टर्मिनल में था जिसे वोटिंग मशीन को मैनेज करने के लिए काम में लिया जाता है।PCAnywhere नाम के इस रिमोट सॉफ्टवेयर का उपयोग 2007 में बंद कर दिया गया था। 

कंपनी का कहना है कि PCAnywhere रिमोट सॉफ्टवेयर से हैकिंग का कोई लेना देना नहीं है। लेकिन, साइबर सिक्योरिटी जर्नलिस्ट और ऑथर किम ज़ेटर का कहना है कि PCAnywhere सिक्योरिटी के लिहाज से बुलेटप्रुफ नहीं है। 2012 में हैकर्स ने खुलासा किया था कि उन्होंने PCAnywhere का सोर्स कोड 2006 में चुरा लिया था। इसके बाद PCAnywhere सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी सिमेंटेक ने कस्टमर्स से PCAnywhere के पुराने वर्जन का सॉफ्टवेयर हटाने के लिए कहा था।

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