हाईवे बनाने से तालाब में पानी की आवक रुकी

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/06/30 05:53

शाहपुरा (भीलवाड़ा)। भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा उपखंड मुख्यालय पर नेशनल हाइवे के निर्माण व चंबल परियोजना की पाइप लाइन डाले जाने के कारण परंपरागत वर्षा के पानी की आवक बाधित होने से सभी रास्ते अवरूद्व हो गये है। शनिवार को उपखंड अधिकारी के आर यादव ने कैकड़ी चैराहा व आस पास के मौके पर पहुंच कर निरीक्षण किया। एसडीएम ने कहा कि वर्षा के पानी की आवक को रोकने का अधिकार किसी को नहीं है। उन्होंने चंबल परियोजना के अभियंताओं आरके गुप्ता व राजकुमार को मौके पर बुलाकर निर्देश दिये कि पानी की आवक को खोलने का कार्य शीघ्र किया जाए ताकि आवक से शाहपुरा के तालाबों में पानी प्रांरभ हो सके। उन्होंने अभियंताओं को जीव दया सेवा समिति संयोजक अत्तू खां कायमखानी के प्रस्ताव के अनुरूप पानी की आवक को खोलने की कार्रवाई करने के निर्देश दिये।

उल्लेखनीय है कि इस लापरवाही के चलते शाहपुरा के प्रमुख जलस्रोत पिवनिया तालाब और नूर घाट में पानी आने के रास्ते अवरुद्ध हो गए हैं। बारिश का पानी इन तालाबों तक नहीं पहुंचकर व्यर्थ बह रहा है। इन जलस्रोतों में शाहपुरा के पूर्व और उत्तर-पूर्व दिशा से बीड़ व ओदी का फाटक क्षेत्र से आवक होती है। करीब 1200 बीघा का पानी शाहपुरा की तरफ आता है। शेष पानी अरनिया घोड़ा की तरफ बहता है। बीड़ का पानी गोकलिया भैरू, नानकी नीमड़ी से बुलिया पंप के पास से धारणी होते हुए नुरघाट में पहुचता हैं। 

इसी प्रकार गुदली व बैरागढ़ में पानी आता है तथा ओवरफ्लो होने पर नया तालाब आरणी में जाता है। करीब 4 महीने पहले नागौर-सतुर हाईवे के निर्माण के दौरान पानी आने के रास्ते जगह-जगह से बंद कर दिए गए। हाल ही में चंबल परियोजना की पाइप लाइन के लिए खोदने के दौरान बीड़ से पानी आने का रास्ता भी रुक गया। पानी के रास्ते में 8-8 फीट ऊंचे मिट्टी के ढेर लगे हैं। इस वजह से बारिश का पानी चंबल प्रोजेक्ट चैराहे के पास से होते हुए शाहपुरा के चारागाह क्षेत्र में फैल गया। जिला परिवहन कार्यालय के बाहर जगह-जगह अवरोधक होने से पानी डाइवर्ट होकर माताजी का खेड़ा क्षेत्र में नया तालाब में जा रहा है। जीव दया समिति के संयोजक अत्तू खां कायमखानी ने उपखंड अधिकारी केआर यादव को ज्ञापन देकर शाहपुरा के तालाबों की आवक को खोलने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि आवक को नहीं खोला गया तो शाहपुरा के तालाब बारिश के बाद भी सुखे रह जायेगें। 

रियासत काल में शाहपुरा में जलस्रोत भरने के लिए जगह-जगह आवक बना रखी थी। नूर घाट भरने के बाद पानी ओवरफ्लो होकर सीधा परकोटे के बाहर बनी खाइयों में पहुंचता है। खाइयों का पानी कलींजरी नाले में पहुंच जाता है। खाइयों के पानी से लबालब होने पर परकोटे के अंदर के सभी को बावड़ी, कुएं, हैंडपंप में जल स्तर बना रहता है। चोतिसिया और प्रतापपुरा की है। ये भी जगह-जगह से अवरुद्ध पड़ी हुई हैं।
 

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