कैसे करे माँ दुर्गा की पूजा? क्या है घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और सरल विधि?

Published Date 2017/09/20 03:25, Written by- Pandit Mukesh Shastri

हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य मुहूर्त देखकर किए जाने का विधान है। धर्म ग्रंथों के अनुसार शुभ मुहूर्त देखकर किए गए कार्य शुभ व सफल होते हैं। तो आइये सबसे पहले यह जान लेते है की इस बार शनिवार दिनाक 1 अक्टूबर के दिन घट स्थापना और देवी पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त कौनसा है?

घट स्थापना के मुहूर्त:
देवी पुराण मे नवरात्रा के दिन देवी का आव्हान, स्थापना और पूजन समय प्रातःकाल मे लिखा है। इस बार शारदीय नवरात्रा प्रारम्भ के दिन प्रातःकाल युक्त द्विस्वभाव लग्न प्रातः 6.18 मिनट से प्रातःकाल 7.49 मिनट तक रहेगा| अतः दिनांक 21 सितम्बर 2017 गुरुवार के दिन घट स्थापना का शुभ समय प्रातः 6.18 मिनट से प्रातःकाल 7.49 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त समय दोपहर 11 बज कर 56  मिनट से दोपहर 12 बज कर 44 मिनट तक अभिजित मुहूर्त में करना सबसे शुभ रहेगा| चौघड़िया के अनुसार प्रातः 10.50 मिनट से दोपहर 1.30 मिनट तक चर और लाभ के चोघड़िए में स्थापना करी जा सकती है । आप सभी इस का ध्यान रखे और लाभ उठाये।
 
देवी पूजा मे घट स्थापना और पूजा किस तरह से की जाए:
प्रतिपदा तिथि को सुबह जल्दी उठकर स्नान एवं नित्यकर्म से निवृत्त हों कर अपने पूजा स्थान पर सबसे पहले घट स्थापना करे। सर्वप्रथम स्नान कर गाय के गोबर से पूजा स्थल का लेपन करें या गंगाजल मिले शुद्ध पानी से अपने पूजा घर की साफ़ सफाई करे| अब आप पूर्वाभिमुख होकर किसी गर्म आसन पर बैठ कर घट स्थापना के लिए पवित्र मिट्टी से वेदी का निर्माण करें, फिर उसमें जौ और गेहूँ– इन दोनों को मिलाकर बोये।उसी वेदी के मध्य सोने, चाँदी, ताँबे या मिट्टी के कलशों को विधि पूर्वक स्थापित कर दे|

कलश को भगवान श्री गणेश का प्रतिरुप माना गया है| इसलिये सबसे पहले कलश का पूजन किया जाता है| कलश लेकर उसमे पूर्ण रूप से जल एवं गंगाजल भर दे| साथ में एक सुपारी, कुछ सिक्के, दूब, हल्दी की एक गांठ कलश मे डाल डालकर दे| अब आप कलश के मुख पर एक नारियल जटा वाला लेकर उसको लाल वस्त्र/चुनरी से लपेट कलश के ऊपर रख दे| कलश के चारो तरफ अशोक वृक्ष या आम के पाँच पत्ते लगा दे| अब आप एक चोकी या बजोट पर लाल वस्त्र बीचा कर उस पर चावल यानि अक्षत से अष्टदल बनाकर उस पर माँ दुर्गा की या आपके कुलदेवी की तस्वीर को स्थापित कर दे| घट स्थापना के साथ अखंड दीपक की स्थापना भी की जाती है। पूजा के समय घी का दीपक जलाएं तथा उसका गंध, चावल, व फूल से पूजा करें।

सबसे पहले देवी पूजा का संकल्प करे| संकल्प में पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी का सिक्का, नारियल (पानी वाला), मिठाई, मेवा, आदि सभी सामग्री थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर संकल्प मंत्र बोलें| अब आप सबसे पहले भगवान गणेश जी की पूजा करे| उसके बाद कलश का पूजन करे| वरुण देवता का पूजन करें| षोडशमातृका का पूजन करे| नव निधियों का पूजन करे| सभी देवी देवताओ ल आव्हान करे| तत्पश्चात माँ दुर्गा की पंचोपचार, षोडश उपचार पूजा करे| देवी का आवाहन करे| उनकी आवाहन, आसन, अर्घ्य, आचमनं, स्नान, स्नानांग आचमन,पंचामृत स्नान, गन्धोदक-स्नान, शुद्धोदक स्नान, आचमन, वस्त्र, सौभाग्य सू़त्र, चन्दन, हरिद्राचूर्ण, कुंकुम, सिन्दूर, कज्जल, दूर्वाकुंर, आभूषण, पुष्पमाला, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, ताम्बूल, दक्षिणा, पुष्पाञ्जलि, नमस्कार और प्रार्थना आदि उपचारों से पूजन करे।

पूजन के पश्चात माँ दुर्गा की अपने परिवार सहित आरती करे और क्षमा प्रार्थना करे। उनसे शुभ आशीर्वाद प्राप्त करे| पूरे नौ दिन तक माँ दुर्गा की इसी प्रकार आरधना करे, मन्त्र जाप करे। प्रतिदिन श्री दुर्गा सप्तशती का पूर्ण पाठ अर्गला, कवच, कीलक सहित करने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है|
 
नवरात्रे के नौ दिनों तक विधिवत उपवास करने के बाद आश्चिन मास, शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन उपवासों का समापन किया जाता है| प्रत्येक उपवासक की यह जिज्ञासा रहती है कि वह माता को भोग में क्या दें कि माता शीघ्र प्रसन्न हों| हिन्दूओं का कोई भी उपवास भोग, प्रसाद के बिना पूरा नहीं होता है| व्रत किसी भी उद्देश्य के लिये किया गया हों, उसमें देवी-देवताओं को भोग अवश्य लगाया जाता है| नवरात्रे के नौ दिनों में नौ देवियों को अलग-अलग भोग लगाया जाता है. आज मै आपको अपने मन वांछित फल की प्राप्ति के लिए नवरात्रा में माँ को तिथि के अनुसार दिए जाने भोग के बारे मे बता रहा हु जिनके करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होकर आपकी सभी मनोकामना पूर्ण करती है|

  • प्रथम नवरात्रि के दिन मां के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करने से आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। तथा शरीर निरोगी रहता है।
  • दूसरे नवरात्रि के दिन मां को शक्कर का भोग लगाएं व घर में सभी सदस्यों को दें। इससे आयु वृद्धि होती है।
  • तृतीय नवरात्रि के दिन दूध या दूध से बनी मिठाई खीर का भोग माँ को लगाकर ब्राह्मण को दान करें। इससे दुखों की मुक्ति होकर परम आनंद की प्राप्ति होती है।
  • मां दुर्गा को चौथी नवरात्रि के दिन मालपुए का भोग लगाएं। और मंदिर के ब्राह्मण को दान दें। जिससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय शक्ति बढ़ती है।
  • नवरात्रि के पांचवें दिन मां को केले का नैवैद्य चढ़ाने से शरीर स्वस्थ रहता है।
  • छठवीं नवरात्रि के दिन मां को शहद का भोग लगाएं। जिससे आपके आकर्षण शक्त्ति में वृद्धि होगी।
  • सातवें नवरात्रि पर मां को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाने व उसे ब्राह्मण को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है एवं आकस्मिक आने वाले संकटों से रक्षा भी होती है।
  • नवरात्रि के आठवें दिन माता रानी को नारियल का भोग लगाएं व नारियल का दान कर दें। इससे संतान संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
  • नवरात्रि की नवमी के दिन तिल का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान दें। इससे मृत्यु भय से राहत मिलेगी। साथ ही अनहोनी होने की घटनाओं से बचाव भी होगा।"

 
किन विशेष मंत्रो का करे जाप-
मनुष्य आज हर तरह से समस्याओं से परेशान है और जब मनुष्य परेशान होता है तब वह भगवान को याद करता है। इन समस्याओं को कम करने में दुर्गा मां के सिद्ध मंत्र प्रभावी होते हैं। मंत्रों में शक्ति होती है। शक्ति देने वाली मां दुर्गा है। दुर्गा सप्तशती में कुछ एैसे सिद्ध मंत्र है जिनसे मनुष्य की हर तरह की पेरशानी दूर हो सकती है। मां दुर्गा के सप्तशती के ये मंत्र धर्म, काम, अर्थ और मोक्ष चारों पुरूषार्थ प्रदान करने वाली है। जो पुरूष मन से और पूरी श्रद्धा से इन मंत्रो का उच्चारण सही तरह से यानी सम्पुट देकर पढ़ता है। उसे निश्चय ही फल प्राप्ती होती है। और वह किसी तरह की समस्या से नहीं डरता।


सबसे पहला और सबसे मुख्य मन्त्र है, इसे नवार्ण मन्त्र के रूप मे जाना जाता है| इस मन्त्र मे पूरी दुर्गा सप्तसती का सार छुपा है| आप कुछ भी न करे और सिर्फ इस मन्त्र का जाप करले तो आप को आपकी सभी इस प्रकार की समस्याओ से चमत्कारिक रूप से मुक्ति मिल जाएगी| मन्त्र इस प्रकार है...   

 

इस मन्त्र के बिना देवी से संबंधित का कोई भी अनुष्ठान सफल एवं सिद्ध नहीं हो पाता।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।


रोग नाश के लिए सिद्ध मंत्र-
ॐ रोगानशेषानपहंसि तुष्टा, रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टिान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां, त्वामाश्रिता हाश्रियतां प्रयान्ति ।।

 
 
शुभ की प्राप्ति के लिए सिद्ध मंत्र-
ॐ करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी।
शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः।।

बाधामुक्त होकर धन और पुत्रादि की प्राप्ति के लिए मंत्र-
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः।।

 
रक्षा प्राप्ति के लिए सिद्ध मंत्र-
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च।।

 
सभी प्रकार के कल्याण के लिए सिद्ध मंत्र-
सर्वमगडलमागडल्ये शिवे सर्वासाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तु ते।।

यह मन्त्र उन विवाह योग कन्याओ के लिए है जिनके विवाह मे विलम्ब  हो रहा हो, लाख प्रयास करने के बाद भी सुयोग्य वर की प्राप्ति नहीं हो रही है.  
ॐ क्लीं ऐं ह्रीं चामुण्डायै विच्चे।

आपके समस्त दुर्भाग्य को ख़त्म करने के लिए, आपकी सभी प्रकार की परेशानी को ख़त्म करने के लिए इस मन्त्र का जाप विशेष लाभदायक परिणाम देने वाला है
ॐ क्लीं ह्रीं ऐं चामुण्डायै

इस मन्त्र के जाप से आपको जीवन में पूर्ण समृद्धि, सफलता और अक्षय कीर्ति प्राप्त होती है।
ऐं क्लीं सौः । 


जो भी मनुष्य इन चुने हुए सिद्ध मंत्रों का उल्लेख अथवा जपता है वह निशचय ही व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से मां दुर्गा जी की सिद्धी प्राप्त करता है। इन मंत्रों में काफी शक्ति है। जो भक्त मां दुर्गा जी के इन मंत्रों को सच्चे मन से भजता है उसकी हर तरह की समस्या और परेशानियां दूर हो जाती है।

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