उन्होंने आगे लिखा कि, 'जो लड़का मारा गया उसे किसी दूसरे तीसरे समुदाय ने नहीं मारा, उसे कैसे सफेद और हरे रंग की आड़ लेकर भगवान ने खुद मारा। जो नहीं बताया जा रहा वह ये कि अब्दुल हमीद की मूर्ति या तस्वीर पे तिरंगा फहराने की बजाय इस तथाकथित तिरंगा रैली में चलने की जबरदस्ती की गई और केसरिया, सफेद, हरे और भगवा रंग पे लाल रंग भारी पड़ गया।'

डिप्टी डायरेक्टर की पोस्ट की चर्चा बड़े अधिकारियों में जोर-शोर से हो रही है। वहीं डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि फेसबुक पोस्ट में ऐसी कोई बात नहीं लिखी गई है, जो किसी के खिलाफ हो। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस मनाने का सभी को अधिकार है। इससे पहले या बाद मनाने का कोई मतलब नहीं होना चाहिए।

साथ ही कहा कि सोशल मीडिया पर कोई गलत मैसेज चलता है, तो उसे रोकने की पहल नहीं होती। बल्कि वायरल होता चला जाता है, इससे माहौल बिगड़ने के हालात पैदा होते हैं। हालांकि अपनी पोस्ट के कुछ ही समय बाद डिप्टी डायरेक्टर बैकफुट पर आती नजर आई। उन्होंने कहा कि उनकी पोस्ट से अगर किसी की भावना आहत हुई है तो वह माफी मांगती हैं।

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कासगंज हिंसा : बरेली डीएम के बाद अब एक और अधिकारी ने फोड़ा फेसबुक बम

Published Date 2018/02/03 03:43, Written by- FirstIndia Correspondent

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के कासगंज में हुई हिंसा को लेकर मचा बवाल थमने से पूर्व ही बरेली डीएम द्वारा फेसबुक पर कुछ पोस्ट किए जाने से हंगामा हुआ था। इसी क्रम में आज एक बार फिर से एक और फेसबुक बम फूटा है, जिसे लेकर चर्चाओं को दौर गरमा गया है। इसी क्रम में अब सहारनपुर की डिप्टी डायरेक्टर की फेसबुक पर पोस्ट से सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है।

बरेली डीएम की पोस्ट से उठा तूफान अभी थमा भी नहीं था कि एक और अधिकारी ने कासगंज हिंसा को लेकर फेसबुक बम फोड़ दिया है। सहारनपुर की डिप्टी डायरेक्टर (सांख्यिकी) रश्मि वरुण कि जिनकी फेसबुक पर पोस्ट से सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है, उन्होंने कासगंज हिंसा की तुलना सहारनपुर के मामले से करते हुए अपने मन की बात लिखी है।

डिप्टी डायरेक्टर रश्मि ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, 'यह ठीक कासगंज की तिरंगा रैली यह कोई नई बात नहीं है। अंबेडकर जयंती पर सहारनपुर के सड़क दूधली में भी ऐसी ही रैली निकाली गई थी। उसमें से अंबेडकर गायब थे या कहिये कि भगवा रंग में विलीन हो गए थे। कासगंज में भी यही हुआ है, तिरंगा गायब और भगवा शीर्ष पर।' 

उन्होंने आगे लिखा कि, 'जो लड़का मारा गया उसे किसी दूसरे तीसरे समुदाय ने नहीं मारा, उसे कैसे सफेद और हरे रंग की आड़ लेकर भगवान ने खुद मारा। जो नहीं बताया जा रहा वह ये कि अब्दुल हमीद की मूर्ति या तस्वीर पे तिरंगा फहराने की बजाय इस तथाकथित तिरंगा रैली में चलने की जबरदस्ती की गई और केसरिया, सफेद, हरे और भगवा रंग पे लाल रंग भारी पड़ गया।'

डिप्टी डायरेक्टर की पोस्ट की चर्चा बड़े अधिकारियों में जोर-शोर से हो रही है। वहीं डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि फेसबुक पोस्ट में ऐसी कोई बात नहीं लिखी गई है, जो किसी के खिलाफ हो। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस मनाने का सभी को अधिकार है। इससे पहले या बाद मनाने का कोई मतलब नहीं होना चाहिए।

साथ ही कहा कि सोशल मीडिया पर कोई गलत मैसेज चलता है, तो उसे रोकने की पहल नहीं होती। बल्कि वायरल होता चला जाता है, इससे माहौल बिगड़ने के हालात पैदा होते हैं। हालांकि अपनी पोस्ट के कुछ ही समय बाद डिप्टी डायरेक्टर बैकफुट पर आती नजर आई। उन्होंने कहा कि उनकी पोस्ट से अगर किसी की भावना आहत हुई है तो वह माफी मांगती हैं।

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