इसके साथ ही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि संशोधन की बात पहले क्यों नहीं रखी गई। उन्होनें इसी बहाने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा में बिल को समर्थन, जनमत में बिल को समर्थन फिर राज्यसभा में क्यों नहीं। जेटली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने 3:2 से दिए अपने फैसले में 6 महीने में तीन तलाक पर कानून बनाने को कहा था। लिहाजा, सरकार जल्दी में इस बिल को संसद में लेकर आई।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह लोकसभा में बिल पास होने के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने खास विरोध नहीं किया था। केवल हैदराबाद के सांसद और एमआईएम के सांसद असद्दुदीन ओवैसी ने इसमें कुछ बदलाव की मांग करते हुए संसोधन प्रस्ताव रखे थे, जो एकतरफा वोटिंग में खारिज हो गए। बाद में आसानी से लोकसभा में यह बिल पास हो गया था। इसके बाद से ही सभी की निगाहें राज्यसभा पर लगी हुई थी।

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लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में तीन तलाक बिल, विपक्षी दलों ने एक सुर में किया विरोध

Published Date 2018/01/03 04:05, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। पिछले सप्ताह लोकसभा में पास होने के बाद तीन तलाक बिल राज्यसभा में केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा पेश किया गया। राज्यसभा में बिल पेश करते ही सदन में हंगामा शुरु हो गया और विपक्ष ने बिल में संशोधन की मांग की। कांग्रेस ने कहा कि बिल को सिलेक्ट कमेटी को भेजा जाए, ताकि वहां पर इस बिल में संशोधन किये जा सकें। वहीं अरूण जेटली ने कहा कि लोकसभा में जहां इस बिल को पास करने के लिए सपोर्ट मिला था, वहीं राज्यसभा में उसका विरोध हो रहा है।

पिछले सप्ताह लोकसभा में पास हो चुके तीन तलाक बिल को राज्यसभा में पास कराना मोदी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, क्‍योंकि उसके पास उच्‍च सदन में बहुमत नहीं है। राज्यसभा में बिल पेश करने के बाद कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने संशोधन पेश करते हुए बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग की और कहा कि बजट सेशन के पहले हफ्ते तक रिपोर्ट आ जाए, ताकि आगे इसपर बहस हो सके।

प्रमुख विपक्षी कांग्रेस सदस्यों ने बिल में शामिल कई प्रावधानों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। विपक्ष के अन्य सांसदों ने भी कांग्रेस के सुर में सुर मिलाया। विपक्ष के ज्यादातर सदस्यों ने इस बिल को स्‍थायी समिति को भेजने की मांग की। हालांकि विपक्ष की आपत्ति को दरकिनार करते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कुछ लोग जबरन विरोध के नाम पर इस बिल की राह में रोड़े अटका रहे हैं।

इसके साथ ही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि संशोधन की बात पहले क्यों नहीं रखी गई। उन्होनें इसी बहाने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा में बिल को समर्थन, जनमत में बिल को समर्थन फिर राज्यसभा में क्यों नहीं। जेटली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने 3:2 से दिए अपने फैसले में 6 महीने में तीन तलाक पर कानून बनाने को कहा था। लिहाजा, सरकार जल्दी में इस बिल को संसद में लेकर आई।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह लोकसभा में बिल पास होने के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने खास विरोध नहीं किया था। केवल हैदराबाद के सांसद और एमआईएम के सांसद असद्दुदीन ओवैसी ने इसमें कुछ बदलाव की मांग करते हुए संसोधन प्रस्ताव रखे थे, जो एकतरफा वोटिंग में खारिज हो गए। बाद में आसानी से लोकसभा में यह बिल पास हो गया था। इसके बाद से ही सभी की निगाहें राज्यसभा पर लगी हुई थी।

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