इस मामले में अब तक कुल 226 चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए थे और कोर्ट के सामने 411 दस्तावेज पेश किए गए, लेकिन NIA को इस केस की जांच में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। क्योंकि 64 गवाह कोर्ट के सामने मुकर गए। इनमें लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित और झारखंड के मंत्री रणधीर कुमार सिंह भी शामिल हैं।

इस मामले में शामिल आरोपियों में स्वामी असीमानंद, देवेन्द्र गुप्ता, लोकेश शर्मा उर्फ अजय तिवाड़ी, लक्ष्मण दास महाराज, मोहनलाल रातेश्वर, राजेंदर चौधरी, भारत मोहनलाल रातेश्वर, रामचंद्र कलसांगरा, संदीप डांगे, सुनील जोशी शामिल हैं। इनमें से जहां रामचंद्र कलसांगरा और संदीप डांगे अभी तक फरार चल रहे हैं, वहीं सुनील जोशी की मौत हो चुकी है।

कब—कब क्या हुआ :
— 18 मई 2007 को जुम्मे की नमाज के दौरान हैदराबाद की ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में अचानक से ब्लास्ट हुआ था। इसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी और 58 लोग घायल हुए थे।
— शुरूआती जांच में सामने आया कि बम वजुखाना में संगमरमर की बेंच के नीचे लगाया गया था। बाद में मक्का मस्जिद में दो बम वजुखाने के पास मिले और एक बम मस्जिद दीवार के पास मिला था।
— इस मामले में दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े 10 लोगों को आरोपी बनाया गया। वहीं एनआईए ने असीमानंद और लक्ष्मण दास महाराज समेत कई दक्षिणपंथी नेताओं को गिरफ्तार किया।
— असीमानंद और लक्ष्मण दास महाराज फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, जबकि तीन अन्य आरोपी हैदराबाद की सेंट्रल जेल में बंद हैं।
— दो मुख्य आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कलसंगरा अभी तक फरार चल रहे हैं। एक अन्य आरोपी सुनील जोशी की मौत हो चुकी है।
— 13 मार्च 2018 को असीमानंद की डिस्क्लोजर रिपोर्ट गायब होने की सूचना मिली, जो कि अगले ही दिन मिल भी गई।

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हैदराबाद मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में असीमानंद समेत सभी आरोपी बरी

Published Date 2018/04/16 12:32, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। करीब 11 साल पहले हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए शक्तिशाली बम ब्लास्ट के मामले आज एनआईए की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। वहीं इस फैसले को देखते हुए हैदराबाद में सुरक्षा व्यवस्था को चाक—चौबंद कर दी गई है। कोर्ट ने अपने फैसले में इस मामले के असीमानंद समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। गौरतलब है कि हैदराबाद मक्का मस्जिद में हुए ब्लास्ट में धमाके में नौ लोगों की मौत हो गई थी। वहीं इससे पूर्व कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 16 अप्रैल तक के लिए टाल दी थी।

एनआईए मामलों की चतुर्थ अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन सत्र सह—विशेष अदालत ने इस मामले में पहले ही पूरी कर ली गई सुनवाई के बाद अपना फैसला सुना दिया है, जिसमें कोर्ट ने इस मामले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। बता दें इस मामले में सीबीआई ने एक आरोप—पत्र दाखिल किया, जिसके बाद साल 2011 में सीबीआई से यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के पास चला गया था। इस मामले में स्वामी असीमानंद समेत कुल 10 लोगों पर आरोप लगा था, वहीं मामले के आरोपियोें में शामिल एक आरोपी की मौत हो चुकी है।

इस मामले में अब तक कुल 226 चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए थे और कोर्ट के सामने 411 दस्तावेज पेश किए गए, लेकिन NIA को इस केस की जांच में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। क्योंकि 64 गवाह कोर्ट के सामने मुकर गए। इनमें लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित और झारखंड के मंत्री रणधीर कुमार सिंह भी शामिल हैं।

इस मामले में शामिल आरोपियों में स्वामी असीमानंद, देवेन्द्र गुप्ता, लोकेश शर्मा उर्फ अजय तिवाड़ी, लक्ष्मण दास महाराज, मोहनलाल रातेश्वर, राजेंदर चौधरी, भारत मोहनलाल रातेश्वर, रामचंद्र कलसांगरा, संदीप डांगे, सुनील जोशी शामिल हैं। इनमें से जहां रामचंद्र कलसांगरा और संदीप डांगे अभी तक फरार चल रहे हैं, वहीं सुनील जोशी की मौत हो चुकी है।

कब—कब क्या हुआ :
— 18 मई 2007 को जुम्मे की नमाज के दौरान हैदराबाद की ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में अचानक से ब्लास्ट हुआ था। इसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी और 58 लोग घायल हुए थे।
— शुरूआती जांच में सामने आया कि बम वजुखाना में संगमरमर की बेंच के नीचे लगाया गया था। बाद में मक्का मस्जिद में दो बम वजुखाने के पास मिले और एक बम मस्जिद दीवार के पास मिला था।
— इस मामले में दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े 10 लोगों को आरोपी बनाया गया। वहीं एनआईए ने असीमानंद और लक्ष्मण दास महाराज समेत कई दक्षिणपंथी नेताओं को गिरफ्तार किया।
— असीमानंद और लक्ष्मण दास महाराज फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, जबकि तीन अन्य आरोपी हैदराबाद की सेंट्रल जेल में बंद हैं।
— दो मुख्य आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कलसंगरा अभी तक फरार चल रहे हैं। एक अन्य आरोपी सुनील जोशी की मौत हो चुकी है।
— 13 मार्च 2018 को असीमानंद की डिस्क्लोजर रिपोर्ट गायब होने की सूचना मिली, जो कि अगले ही दिन मिल भी गई।

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