तपते रेतीले धोरों पर 'रणबांकुरों' का साहस और शौर्य प्रदर्शन

Published Date 2018/05/09 06:47,Updated 2018/05/09 07:24, Written by- FirstIndia Correspondent

बीकानेर(लक्ष्मण राघव)- भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास भीषण गर्मी व तपते रेतीले धोरों के बीच चल रहे युद्धाभ्यास 'विजय प्रहार' का आज समापन हुआ। इसमें पहली बार ‘एयर कैवेलरी’ को शामिल किया गया था। तपते धोरों पर गरजते टैंको के बीच रणबांकुरों का साहस और शौर्य दुश्मन मुल्क को ये बताने काफी था कि हर नापाक इरादा नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा।

पिछले एक माह में आग बरसाते सूरज के बीच तपते रेतीले धोरों के मध्य जारी युद्धाभ्यास विजय प्रहार का आज समापन हुआ। हथियारयुक्त हेलीकाॅप्टर, युद्धक्षेत्र पर नए अस्त्रों के साथ आधुनिक सेंसर और उच्च परिशुद्धता हथियारों से लैस ये युद्धाभ्यास ग्राउंड कमांडरों को निर्णायक, साहसी और आक्रामक तरीके से कार्य करने की सहूलियत देते हैं। हवा में आंखें और हथियारों के साथ दुश्मन पर हर पल नजर रखे हुए हैं।

अभ्यास के अंत में रणबांकुरों का ये कहना कि, ‘वे जितना चाहें उतना दौड़ सकते हैं, लेकिन हम उन्हें बर्बाद कर देंगे।’ विजय प्रहार का हर हाल में विजय के लिए साफ संदेश है। आज समापन के मौके पर लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मैथसन, आर्मी कमांडर दक्षिण पश्चिमी कमान ने कहा कि मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में दुश्मन पर विजय के लिए ही विजय प्रहार है।

युद्धाभ्यास का आज भले ही कहने को आखिरी दिन था, लेकिन रणबांकुरों के साहस और शौर्य को देखकर लग रहा था मानों युद्ध का ही दृश्य है। भारत पाक के बीच कभी युद्ध की परिस्थितिया बनी तो भारतीय सेना के लिए अटैक का यही मार्ग सबसे सुगम होगा। लेकिन इसके लिए गर्मी में पानी के बिना मुश्किल परिस्थितियों में खुद को अनुकूलित करने के लिए ऐसे लम्बे युद्धाभ्यास जरूरी है।

विजय प्रहार भी ऐसा ही एक युद्धाभ्यास रहा। रेतीले धोरो पर दुश्मन का ठिकाना था पिंक क्राई ताल, तो भारत की सेना का ठिकाना था ब्राउन हट। कैसे कैनाल को पार करते हुए समन्वय के साथ आक्रमकता और चपलता बरकरार रखनी है और कैसे एयर कैवेलरी की मदद से दुश्मन को फतह करना है, यही सब तो था विजय प्रहार। 20 हजार सैनिकों ने विकट परिस्थितियों में समन्वय के साथ विजय का मंत्र सीखा और अपना दमखम दिखाया।

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