घोषणाओं—आंकड़ों का भ्रमजाल है राजस्थान बजट 2018 : अशोक गहलोत

Published Date 2018/02/12 06:59, Written by- FirstIndia Correspondent

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में आज मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा पेश किए गए राजस्थान बजट 2018—19 पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। गहलोत ने प्रदेश भाजपा सरकार के कार्यकाल के अंतिम बजट को निराशाजनक बताया है। गहलोत ने कहा कि इससे बड़ी विडम्बना क्या होगी कि अभी तक तो पिछले बजट भाषण की घोषणाएं ही क्रियान्विति का इन्तजार कर रही है। ऐसे में अब चंद माह के समय में सरकार से किसी प्रकार की उम्मीद नहीं की जा सकती।

गहलोत ने कहा कि सरकार ने जनता को सिर्फ घोषणाओं और आंकड़ों के भ्रमजाल में डालने का काम किया है। सरकार किसानों की सिर्फ बात कर रही है और हकीकत में कुछ करना नहीं चाहती। किसानो को उनकी उपज का सही दाम तक नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसानों को राहत प्रदान करने के लिए उनकी सम्पूर्ण कर्ज माफी होनी चाहिए थी, लेकिन बजट में किसानों को निराशा ही हाथ लगी है।

प्रदेश के युवाओं को बजट से जितनी भी उम्मीदें थी, सब धूमिल हो गई हैं। पिछले चुनाव में जो संकल्प पत्र जारी किया गया था, सरकार उसको भूल बैठी है। 15 लाख नौकरियों का वादा महज वादा ही रह गया। छात्रों, युवाओं, किसानों, एससी/एसटी, माईनोरिटी, एसबीसी, आर्थिक पिछड़ों आदि के लिए कई वादे किये गये थे, उनको पूरा नहीं किया गया। इन वर्गों के लिए हमारी सरकार ने देवनारायण योजना की तर्ज पर जो विशेष प्रावधान किये थे, उनका कोई अता-पता ही नहीं है।

गहलोत ने कहा कि राजस्थान की महत्वाकांक्षी परियोजना जयपुर मेट्रो फेज-2, आदिवासी क्षेत्र की डूंगरपुर-बांसवाडा-रतलाम रेल लाइन और भीलवाड़ा में मेमोकोच फैक्ट्री पर मेरे सारे सवाल आज तक यथावत बने हुए हैं। इस बजट में इनके बारे में कोई बात नहीं की गई, जबकि राजस्थान के आधारभूत ढांचे में ये योजनाएं मील का पत्थर साबित होती। वहीं बजट में जोधपुर मेट्रो की भी अनदेखी की गई है।

इसी प्रकार से परबन सिंचाई परियोजना का शिलान्यास पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय किया गया था, लेकिन यह सरकार बार-बार बजट में महज घोषणाएं किये जा रही है और अब एक बार फिर से घोषणा कर दी गई है। गहलोत ने कहा कि वसुंधरा राजे को जनता ने दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर दिया है। जबसे केन्द्र में मोदी सरकार आई है, तब से केन्द्र एवं राज्य सरकार बड़े-बड़े जुमले जैसे स्किल डवलपमेंट, स्मार्ट सिटी, मेक इन इंडिया, डिजीटल इंडिया, स्किल इंडिया आदि में ही उलझ कर रह गई है, इनका जमीन पर आम लोगों को कोई लाभ नहीं मिल पाया।

गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री नए विद्यालय खोलने की बात कर रही हैं, जबकि हकीकत यह है कि प्रदेश में विद्यालय बंद किये जा रहे हैं। महंगाई को प्रमुख मुद्दा बनाकर सत्ता में आई भाजपा सरकार को महंगाई की कोई चिंता नहीं है। रसोई गैस के दामों में भारी वृद्धि की गई है। भाजपा सरकार ने महंगाई से राहत देने के लिए बजट में कोई कदम नहीं उठाया है, जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय एक मात्र राजस्थान ऐसा प्रदेश था, जिसने रसोई गैस पर प्रति सिलेण्डर सहित पेट्रोल एवं डीजल पर लगभग 400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी दी थी।

गहलोत ने कहा कि कर और राहत हर बजट में होते हैं और हर बजट की अपनी एक दिशा भी होती है, लेकिन मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे द्वारा पेश पिछले सभी बजट की तरह इस अंतिम बजट में भी राजस्थान के विकास की कोई दिशा नहीं है। संभाग स्तर पर ज्यादातर घोषणाएं सिर्फ कागज तक सीमित हैं। बजट में विद्यार्थी मित्रों, कम्प्यूटर शिक्षकों, शिक्षा प्रेरकों आदि की समस्याओं के निदान की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया और ना ही इसमें गरीबों के उत्थान की कोई योजना है। 

पूर्व मुख्यमंत्री ने बजट को महज घोषणाओं का पिटारा बताते हुए कहा कि पहले के बजट में की गई घोषणाएं भी अभी ठीक से लागू नहीं हो पा रही है। ऐसे में प्रदेश में रहने वाला हर प्रदेशवासी खुद को एक बार फिर ठगा सा महसूस कर रहा है। प्रदेश की जिस जनता ने इतना भारी बहुमत देकर भाजपा को सत्ता सौंपी थी, उसी जनता ने उपचुनाव में भाजपा को आईना दिखा दिया है। ऐसे में भाजपा को सबक सिखाने के लिए जनता को अब विधानसभा चुनावों का बेसब्री से इन्तजार है।

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