कर्नाटक किसका : देवगौड़ा—सोनिया गांधी के बीच सेतु बने गहलोत

Dinesh Kumar Dangi Published Date 2018/05/16 08:15

जयपुर। कर्नाटक में सीएम किसका बनेगा इसको लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है, लेकिन नंबर दो पार्टी बनने के बाद कांग्रेस ने जो राजनीतिक पासा खेला उससे भाजपा की चाल बिगड़ गई। और इस चाल को चला सियासत के जादूगर अशोक गहलोत ने। बताया जा रहा है कि आलाकमान ने कर्नाटक में गुलाम नबी आजाद के साथ गहलोत को दूत बनाकर भेजने की जिम्मेदारी दी। उसमें गहलोत अब तक खरे साबित होते दिख रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने और कांग्रेस को 78 सीटों मिलने पर जेडीएस को तुरंत समर्थन देने की घोषणा का ऐलान करना गहलोत का ही आइडिया था। गहलोत की इस सलाह पर आजाद ने भी तुरंत हामी भर दी और सोनिया का लगा दिया फोन। सोनिया गांधी ने फिर गहलोत से भी फोन पर बातचीत की।

इतना ही नहीं, गहलोत ने पहले सोनियां गांधी से इसके लिए तुरंत पूर्व पीएम देवगौड़ा से बात करने की राय दी। सोनिया ने एक मिनट की भी देरी नहीं करते हुए तुरंत देवगौड़ा को फोन घुमा डाला। बाद में गहलोत औऱ आजाद ने देवगौड़ा से गठनबंधन करने की अहम बैठक की। अब गहलोत कांग्रेस के साथ जेडीएस के विधायक नहीं टूटे इसके लिए मजबूत घेराबंदी कर दी है। गहलोत तमाम विधायकों को अपने अनुभव से मैनेज करते हुए एकजुटता का मंत्र देने में अब तक कामयाब होते दिख रहे हैं।

ऐसे में एक बार फिर जादूगर अपने सियासी कौशल का जादू दिखाने में कामयाब हुए। पार्टी के नेता कह रहे हैं कि गहलोत जैसा अनुभवी नेता को कर्नाटक में नहीं भेजते तो अब तक खेल खत्म हो जाता। अब अगर जेडीएस औऱ कांग्रेस सरकार बना लेते हैं तो गहलोत का आलाकमान के सामने ही नहीं, बल्कि पार्टी में रुतबा और कद दोनों बढ़ जाएगा।

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