इस फैसले के बावजूद बीसीसीआई ने श्रीसंत के क्रिकेट से आजीवन प्रतिबंध के फैसले को बरकरार रखा है। भारतीय क्रिकेट और आईपीएल के इतिहास के इस सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामले में 36 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया था, जबकि राजस्थान और अन्य फ्रेंचाइजी चेन्नई सुपरकिंग्स दो—दो वर्ष के लिए बैन कर दिया गया था, जो इस वर्ष 11वें संस्करण से फिर से लीग में वापसी कर रही है। एकमात्र जज की एकलपीठ ने तेज गेंदबाज के समर्थन में फैसला सुनाते हुए उन पर से आजीवन प्रतिबंध को हटाने का फैसला किया था, लेकिन बीसीसीआई ने इस एकलपीठ के निर्णय के खिलाफ याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने भारतीय बोर्ड के समर्थन में फैसला दिया और श्रीसंत पर आजीवन प्रतिबंध को बरकरार रखा। 

BCCI ने सबूतों के तहत लगाया है प्रतिबंध :
अदालत की दलील थी कि क्रिकेटर पर लगाया गया प्रतिबंध उनके अधिकारों का हनन नहीं है। वहीं बीसीसीआई ने दलील दी थी कि श्रीसंत के खिलाफ स्पॉट फिक्सिंग मामले में पुख्ता सबूत मिले हैं और इसी के आधार पर उन्हें क्रिकेट से आजीवन प्रतिबंधित किया जा रहा है। क्योंकि बोर्ड की भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टोलरेंस नीति है। इससे पहले एकलपीठ ने सात अगस्त 2017 को श्रीसंत के समर्थन में फैसला सुनाते हुये उनके क्रिकेट में वापसी का रास्ता साफ कर दिया था। श्रीसंत पिछले काफी समय से क्रिकेट में वापसी के प्रयास में लगे हैं। वह कई विदेशी क्रिकेट लीगों में खेलने के लिये भी बीसीसीआई से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की गुहार लगा चुके हैं। 

श्रीसंत पर लगे बैन से पहले वो टीम इंडिया के लिए 27 टेस्ट, 53 वनडे और 10 टी 20 मैच खेल चुके हैं। 27 टेस्ट मैचों में इस तेज़ गेंदबाज के नाम 87 विकेट हैं तो वहीं 53 वनडे मैचों में उन्होंने 75 बल्लेबाज़ों को पवेलियन की राह दिखाई थी। 10 टी—20 मुकाबलों में श्रीसंत के नाम सिर्फ 7 ही विकेट दर्ज़ हैं।

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श्रीसंत बैन मामला : सुप्रीम कोर्ट ने मांगा BCCI से 4 हफ्तों में जवाब

Published Date 2018/02/05 01:49,Updated 2018/02/05 02:01, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेटर शांतकुमारन श्रीसंत के आजीवन प्रतिबंध के खिलाफ याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। भारतीय क्रिकेटर श्रीसंत ने केरल उच्च न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती दी है, जिसमें बीसीसीआई द्वारा 2013 में आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग का दोषी पाए जाने के बाद उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था।

गौरतलब है कि श्रीसंत पर इंडियन प्रीमियर लीग 2013 के संस्करण में स्पॉट फिक्सिंग में संलिप्त पाये जाने के बाद बीसीसीआई ने आजीवन प्रतिबंध लगाया था। श्रीसंत आईपीएल की टीम राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ी थे। 1 फरवरी को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ के सामने इस मामले के आने के बाद उन्होंने इसे रोस्टर के अनुसार एक उपयुक्त पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था। इस पीठ ने कहा था कि इस मामले को पांच फरवरी को रोस्टर के मुताबिक उपयुक्त पीठ के समक्ष रखा जाए।

आज हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भारत में क्रिकेट चलाने वाली संस्था बीसीसीआई को आदेश दिया कि वो श्रीसंत के आजीवन बैन पर चार हफ्तों के अंदर अपना जवाब दें। श्रीसंत के अलावा राजस्थान टीम के दो अन्य खिलाड़ियों अंकित चव्हाण और अजीत चंदीला को जुलाई 2015 में पटियाला हाउस कोर्ट ने बरी कर दिया था।

इस फैसले के बावजूद बीसीसीआई ने श्रीसंत के क्रिकेट से आजीवन प्रतिबंध के फैसले को बरकरार रखा है। भारतीय क्रिकेट और आईपीएल के इतिहास के इस सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामले में 36 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया था, जबकि राजस्थान और अन्य फ्रेंचाइजी चेन्नई सुपरकिंग्स दो—दो वर्ष के लिए बैन कर दिया गया था, जो इस वर्ष 11वें संस्करण से फिर से लीग में वापसी कर रही है। एकमात्र जज की एकलपीठ ने तेज गेंदबाज के समर्थन में फैसला सुनाते हुए उन पर से आजीवन प्रतिबंध को हटाने का फैसला किया था, लेकिन बीसीसीआई ने इस एकलपीठ के निर्णय के खिलाफ याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने भारतीय बोर्ड के समर्थन में फैसला दिया और श्रीसंत पर आजीवन प्रतिबंध को बरकरार रखा। 

BCCI ने सबूतों के तहत लगाया है प्रतिबंध :
अदालत की दलील थी कि क्रिकेटर पर लगाया गया प्रतिबंध उनके अधिकारों का हनन नहीं है। वहीं बीसीसीआई ने दलील दी थी कि श्रीसंत के खिलाफ स्पॉट फिक्सिंग मामले में पुख्ता सबूत मिले हैं और इसी के आधार पर उन्हें क्रिकेट से आजीवन प्रतिबंधित किया जा रहा है। क्योंकि बोर्ड की भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टोलरेंस नीति है। इससे पहले एकलपीठ ने सात अगस्त 2017 को श्रीसंत के समर्थन में फैसला सुनाते हुये उनके क्रिकेट में वापसी का रास्ता साफ कर दिया था। श्रीसंत पिछले काफी समय से क्रिकेट में वापसी के प्रयास में लगे हैं। वह कई विदेशी क्रिकेट लीगों में खेलने के लिये भी बीसीसीआई से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की गुहार लगा चुके हैं। 

श्रीसंत पर लगे बैन से पहले वो टीम इंडिया के लिए 27 टेस्ट, 53 वनडे और 10 टी 20 मैच खेल चुके हैं। 27 टेस्ट मैचों में इस तेज़ गेंदबाज के नाम 87 विकेट हैं तो वहीं 53 वनडे मैचों में उन्होंने 75 बल्लेबाज़ों को पवेलियन की राह दिखाई थी। 10 टी—20 मुकाबलों में श्रीसंत के नाम सिर्फ 7 ही विकेट दर्ज़ हैं।

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