गौरतलब है कि पुणे में भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं सालगिरह पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में दलित समाज के करीब 3 लाख लोग इकट्ठा हुए थे, जिसमें बाहरी राज्यों के लोग भी आए थे। इसी कार्यक्रम के दौरान पुणे में दो गुटों के बीच पहले कहासुनी हुई, फिर बात हिंसा में बदल गई, जिसमें एक युवक की मौत भी हो गई। इसके बाद यह हिंसा पूरे महाराष्ट्र में फैल गई। पुणे, अकोला, औरंगाबाद और ठाणे से लेकर मुंबई तक में हालात बेकाबू हो गए।

इसके बाद मंगलवार को मुंबई में भी विरोध प्रदर्शन हुए तथा दलित समूहों ने समूचे महाराष्ट्र में 3 जनवरी को बंद का आह्वान किया। बुधवार शाम को जिग्नेश मेवानी ने शांति की अपील की और ट्वीट किया कि महाराष्ट्र सरकार को कानून एवं व्यवस्था को सुनिश्चित करना चाहिए, मैं महाराष्ट्र की जनता से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं।

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पुणे हिंसा : जिग्नेश—खालिद के कार्यक्रम पर रोक व FIR दर्ज, 300 लोगों को लिया हिरासत में

Published Date 2018/01/04 12:57,Updated 2018/01/04 01:02, Written by- FirstIndia Correspondent

मुंबई। महाराष्ट्र के पुणे में हुई जातीय हिंसा के बाद पुलिस ने आज मुंबई में आयोजित होने वाले जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद के कार्यक्रम पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही इन दोनों एवं कार्यक्रम के आयोजकों समेत 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है तथा करीब 300 लोगों को हिरासत में लिया गया है। जिग्नेश और खालिद पर पुणे में हुए कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। 

मुंबई पुलिस ने एक यहां आयोजित होने वाले एक समारोह को रद्द कर दिया है, जिसमें हाल ही में विधायक बने गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवानी तथा दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में देश विरोधी नारे लगाने के बाद चर्चित हुए छात्रनेता उमर खालिद को शिरकत करनी थी। पुलिस ने कार्यक्रम के आयोजक विद्यार्थियों को भी ऐहतियात के तौर पर हिरासत में ले लिया है।

गौरतलब है कि मुंबई के भाईदास हॉल में छात्र भारती नाम के संगठन द्वारा जिग्नेश और उमर को कार्यक्रम में बुलाया गया था। छात्र भारती के उपाध्यक्ष सागर भालेराव ने बताया कि उन्होंने भाईदास हॉल को अपने संगठन के ऑल इंडिया समिट के लिए बुक किया था। लेकिन पुलिस अब इस कार्यक्रम में किसी को जाने नहीं दे रही है। सागर भालेराव का कहना है कि मुंबई पुलिस ने पिछले दो तीन दिनों की हिंसा का हवाला देकर कार्यक्रम रद्द कर दिया है।

गौरतलब है कि पुणे में भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं सालगिरह पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में दलित समाज के करीब 3 लाख लोग इकट्ठा हुए थे, जिसमें बाहरी राज्यों के लोग भी आए थे। इसी कार्यक्रम के दौरान पुणे में दो गुटों के बीच पहले कहासुनी हुई, फिर बात हिंसा में बदल गई, जिसमें एक युवक की मौत भी हो गई। इसके बाद यह हिंसा पूरे महाराष्ट्र में फैल गई। पुणे, अकोला, औरंगाबाद और ठाणे से लेकर मुंबई तक में हालात बेकाबू हो गए।

इसके बाद मंगलवार को मुंबई में भी विरोध प्रदर्शन हुए तथा दलित समूहों ने समूचे महाराष्ट्र में 3 जनवरी को बंद का आह्वान किया। बुधवार शाम को जिग्नेश मेवानी ने शांति की अपील की और ट्वीट किया कि महाराष्ट्र सरकार को कानून एवं व्यवस्था को सुनिश्चित करना चाहिए, मैं महाराष्ट्र की जनता से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं।

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